22/12/2017   समय से पहले बालिग होते किशोरों को सबक
गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल के दूसरी कक्षा के 7 वर्षीय प्रद्युम्न की हत्या के मामले में किशोरवय आरोपी पर बालिग की तरह मुकदमा चलेगा। किशोर न्यायालय बोर्ड ने यह फैसला सुनाते हुए प्रकरण गुडग़ांव सेशन कोर्ट को स्थानांतरित कर दिया है। अभियुक्त छात्र को बालिग मानकर उस पर व्यस्कों की तरह मुकदमा चलना उन सभी किशोंरों के लिए सबक है, जो समय से पहले बालिग होकर हिंसक व यौनिक प्रवृत्तियों के शिकार हो रहे हैं।

दरअसल सीबीआई और बोर्ड ने प्रद्युम्न की हत्या को जघन्य अपराध माना है। जिन परिस्थितियों में इस क्रूर कृत्य को अंजाम दिया गया है, उससे जाहिर है कि आरोपी छात्र मानसिक रूप से इतना परिपक्व था कि वह भलीभांति जान-समझ रहा था कि इस हत्या के परिणाम क्या हो सकते हैं ? इसीलिए हत्या के बाद वह इतना सामान्य बना रहा कि दिल्ली पुलिस की पकड़ से साफ बच गया। साफ है, जब कोई आरोपी इस मानसिक अवस्था को पहुंच गया हो तो उसपर वयस्कों की तरह ही मुकदमा चलाना उचित है । इस कानून के लागू होने के बाद यह पहला मामला है कि किसी नाबालिग पर बालिगों की तरह मुकदमा चलेगा। इस हत्याकांड के
मामले में दिल्ली पुलिस ने पहले केवल संदेह के आधार पर स्कूल बस के परिचालक अशोक को हिरासत म ें ल े लिया था। मगर उस पर सवाल उठन े के बाद जब सीबीआर्इ  ने जांच आरंभ की तो मामला पूरी तरह पलट गया और उसी स्कूल के 11वीं के छात्र को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी छात्र ने यह हत्या सिर्फ इसलिए की थी, जिससे परीक्षा की तिथि आग े बढ ़ जाए। इस समय आरोपी छात्र की उम ्र 16 साल पाचं महीन े थी। इस कारण यह उलझन पैदा हुई कि इस पर किशोर न्याय अधिनियम के तहत मुकदमा चले या वयस्कों की तरह। अंतत: किशोर न्यायालय बोर्ड ने वयस्कों की तरह मामला चलाने का फैसला ले लिया। कुछ समय से देखने में आ रहा है कि हत्या और बलात्कार जैसे जघन्य मामलों में 16 से 18 साल के किशोरों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। एनसीआरबी के अनुसार 2002 से लेकर 2012 तक नाबालिगों द्वारा बलात्कार के मामलों में 125 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी अवधि में हत्या के मामलों म ें किशोरं ो ं की सख्ं या म ें 87 प्िर तशत की वृद्धि दर्ज  की गर्इ  ह।ै निश्चित रूप स े य े आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इस लिहाज से किशोर पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाना जायज है।दरअसल दिसंबर 2012 में दिल्ली में चलती बस में एक मेडिकल छात्रा से बलात्कार और क्रूरता पूर्वक की गई हत्या का मामला सामने आया था। इसमें एक आरोपी नाबालिग भी था। पुराने कानून के मुताबिक उसे सजा के तौर पर महज तीन साल सुधार गृह में रखा गया। इसके बाद वह बरी हो गया। इस कानूनी प्रावधान की जानकारी फै लन े पर आम लोग आक्रोश और क्षोभ स े भर गए। दिल्ली म ें इस काननू म ें बदलाव को लेकर अर्से तक प्रदर्शन हुए। नतीजतन किशोर न्याय अधिनियम (बच्चों की देखभाल और सरंक्षण) 2014 वजूद में आया। गोया, जघन्यतम अपराधों में शामिल किशोरों पर वयस्कों की तरह मुकदमा चलाने का मार्ग खुल गया। इस कानून में प्रावधान रखा गया कि आरोपी किशोर पर वयस्कों की तरह मामला चले अथवा नहीं, इसका फैसला लेने का अधिकार किशोर न्याय बोर्ड के पास होगा। हालांकि इस कानून में दर्ज प्रावधानों के मुताबिक आरोपी नाबालिग छात्र को उम्र कैद या मौत की सजा नहीं दी जा सकेगी।


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