06/01/2014   प्रस्तुति: बस्तर बैंड
निर्देषक: अनूप रंजन पांडेय भाशा: ग़ैर षाब्दिक अवधि: प्रस्तुति बस्तर बैंड, बस्तर के लोक एवं पारंपरिक जीवन का सांगीतिक स्वर है। इसमें सदियों से चली आ रही आदिम संस्कृति एवं संगीत की अनुगूँज है। बस्तर बैंड में समूचे बस्तरिया समुदाय के विलुप्त होते पारंपरिक, प्रतिनिधि लोक एवं आदिम वाद्यों की सामूहिक अभिव्यक्ति है।

बस्तर में आदिवासी लिंगो देव को अपना संगीत गुरू मानते हैं। मान्यता यह भी है कि लिंगो देव ने ही इन वाद्यों की रचना की थी। लिंगो पाटा या लिंगो पेन में लिंगो देव के गीतों और उनके द्वारा बजाए जाने वाले विभिन्न वाद्यों का वर्णन मिलता है। यद्यपि वर्णन में प्रयुक्त कुछेक वाद्य लगभग विलुप्त हो चुके हैं, बावजूद इसके बस्तर बैन्ड में कोइतोर या कोया समाज जिनमें मुरिया, दंडामी माडिया, धुरवा, दोरला, मुंडा, माहरा, गदबा, भतरा, लोहरा, परजा, मिरगिन, हलबा आदि तथा अन्य कोया समाज के पारंपरिक एवं संस्कारों में प्रयुक्त वाद्य संगीत, सामूहिक आलाप-गान को प्रस्तुत किया जा रहा है।
मुख्य लोक वाद्य यंत्र
माडिया ढोल, तिरडुडी, अकुम, तोडी, तोरम, मोहिर, देव मोहिर, नंगूरा, तुड़बुड़ी, कुंडीड़, धुरवा ढोल, डंडार ढोल, गोती बाजा, मुंडा बाजा, नरपराय, गुटापराय, मांदरी, मिरगीन ढोल, हुलकी मांदरी, कच टेहंडोर, पक टेहंडोर, उजीर, सुलुड, बाँस, चरहे, पेन ढोल, ढुसीर, कीकीड, टुडरा, कोन्डोडका, हिरनाँग, झींटी, चिटकुल किरकीचा, डन्डा, धनकुल बाजा, तुपकी, सियाडी बाजा, वेछुर, गोगा ढोल।
निर्देषक
बिलासपुर में जन्मे अनूप रंजन पांडेय, विगत तीन दषक से लोक-रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय हैं। छत्तीसगढ़ी लोक नाट्य नाचा से आपने अपने कला कर्म की षुरूआत की। आप छत्तीसगढ़ के दुर्लभ लोक वाद्यों के अध्येता हैं। लोक वाद्यों के संग्राहक के रूप में आपकी विषेश पहचान है। आपके निजी संग्रह में लगभग 110 पारंपरिक लोक वाद्य संग्रहित है, जिसका षोधार्थी समय-समय पर लाभ लेते रहते हैं।
आपने प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद बस्तर के युवा कलाकारों को सृजनकर्म की दिषा में जोड़कर बस्तर बैंड की स्थापना की है।
अंतर्राश्ट्रीय ख्याति प्राप्त रंग संस्था नया थियेटर में पद्मविभूशण हबीब तनवीर द्वारा निर्देषित नाटकों में आपकी प्रमुख भूमिका रही है। आपने देष एवं विदेष के अनेक प्रतिश्ठापूर्ण समारोहों में भागीदारी कर सराहना अर्जित की है। आपको दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा गुरू वृत्ति एवं संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सीनियर फ़ेलोषिप आदि अनेक सम्मानों से सम्मानित किया गया है।
वर्तमान में आप संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली के कौंसिल मेम्बर हैं।
कलाकार
माया लक्ष्मी सोरी, बधुराम सोरी, विनोद सोरी, कोसादेवा, चंदेर सलाम, दसरू कोर्राम, षांति दुग्गा, जुगो सलाम, श्रीनाथ नाग, कमल सिंघ बघेल, समारू राम नाग, अनंत राम चालकी, विक्रम यादव, मनदेई बघेल, रंगबती बघेल, बाबूलाल बघेल, लच्छू राम सोरी, बाबूलाल सोरी, सहादुर नाग, फागुराम भवानी, लक्ष्मण पोयाम, लुदो सोरी, नवेल राम कोराम, अस्मिता पांडे, अनूप रंजन तथा अन्य।
परिकल्पना, संयोजन एवं निर्देषन:    अनूप रंजन पांडेय
 


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