अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी के भारत आगमन और उनके प्रति दिखाए गए गरिमामयी स्वागत पर प्रसिद्ध साहित्यकार एवं गीतकार जावेद अख्तर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस स्वागत को देश की शर्मनाक स्थिति बताते हुए अपने दर्द और निंदक शब्दों में अपनी नाराजगी जाहिर की है।
मुत्तकी 9 से 16 अक्टूबर तक भारत में हैं। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के देबन्द स्थित दारुल उलूम देबन्द का दौरा किया, जहां उनका अभिनंदन बड़े पैमाने पर किया गया। अख्तर ने सोशल मीडिया पर लिखा ।
उन्होंने विशेष रूप से देबन्द संस्था की निंदा करते हुए कहा कि यह उन्हें इस्लामी हीरो कहने योग्य स्वागत देना बेहद शर्मनाक है, खासकर तब जब तालिबान ने लड़कियों की शिक्षा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है। अख्तर ने आम जनता से भी सवाल पूछा कि हमारे देश में क्या हो रहा है?
मुत्तकी की भारत यात्रा को दोनों देशों के बीच रिश्तों को सुधारने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। भारत ने संकेत दिया है कि वह काबुल में अपनी तकनीकी मिशन को पूर्ण दूतावास का दर्जा देने की योजना बना रहा है। लेकिन इस स्वागत ने देश में राजनीतिक, सामाजिक और कूटनीतिक बहस को भी उछाल दिया है।
हाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, जब महिला पत्रकारों को आमंत्रित नहीं किया गया, तब भी विवाद हुआ। बाद में उन्हें शामिल किया गया, और इस घटना को तकनीकी समस्या के रूप में बताया गया। अख्तर और अन्य आलोचकों का कहना है कि स्वागत और सम्मान देना स्वाभाविक रूप से किसी समूह या सरकार की मान्यता नहीं हो सकती, मगर इसे स्वीकार करने की नैतिक और भावनात्मक सीमाएँ होती हैं।
इस प्रकार, जावेद अख्तर की तीखी टिप्पणी ने इस यात्रा और स्वागत की राजनीति, नैतिकता और जनता की संवेदनशीलताओं को एक बड़े सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है।












