बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों की मतगणना जारी है, और शुरुआती रुझानों ने सत्ता के समीकरण लगभग साफ कर दिए हैं। अब तक के रुझानों के अनुसार एनडीए 160 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि महागठबंधन 77 सीटों पर आगे चल रहा है। इन रुझानों ने चुनावी तस्वीर को काफी हद तक स्पष्ट कर दिया है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए गठबंधन के लिए यह एक बड़ी सफलता साबित होती नजर आ रही है।
चुनाव प्रचार के दौरान ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आत्मविश्वास के साथ दावा किया था कि बिहार में एनडीए एक शानदार और ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी। उनके अनुसार, जनता ने विकास, सुशासन और स्थिरता को ध्यान में रखते हुए गठबंधन पर भरोसा जताने का मन पहले ही बना लिया था। अब जब शुरुआती रुझान केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व की भविष्यवाणी को सही साबित करते दिखाई दे रहे हैं, तो एनडीए की जीत लगभग तय मानी जाने लगी है।
अमित शाह ने यह भी कहा था कि एनडीए गठबंधन में किसी भी तरह का विवाद नहीं है और सभी दल एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरे हैं। उनकी यह टिप्पणी विपक्ष के उन आरोपों के जवाब में आई थी, जिसमें महागठबंधन नेताओं ने एनडीए के भीतर सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर असंतोष होने की बात कही थी। शाह ने साफ कहा था कि जनता ने फर्जी आरोपों पर नहीं, बल्कि ज़मीनी कार्यों पर भरोसा किया है।
शाह के अनुसार, बिहार में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाए गए विकास कार्यक्रम, महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण, सड़क-बिजली-स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए सुधार और गरीब वर्ग के लिए योजनाएं एनडीए को बढ़त दिलाने वाली प्रमुख वजहें हैं। उन्होंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना और किसान सम्मान निधि का उल्लेख किया था, जिन्हें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अच्छा समर्थन मिला।
दूसरी ओर, महागठबंधन शुरुआती रुझानों में पिछड़ता दिख रहा है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन ने बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन अब तक के रुझानों से संकेत मिलता है कि मतदाताओं ने एनडीए पर अधिक भरोसा जताया है। हालांकि अंतिम नतीजे आने तक महागठबंधन उम्मीद कायम रखे हुए है, लेकिन बदलते रुझानों ने उनके खेमे में चिंता बढ़ा दी है।
मतगणना के साथ ही एनडीए कार्यालयों में जश्न का माहौल बनने लगा है, जबकि पटना और अन्य जिलों में कार्यकर्ता ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न की तैयारियों में जुट गए हैं। वहीं, महागठबंधन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अंतिम परिणाम का इंतजार कर रहा है।
कुल मिलाकर, बिहार की जनता ने एक बार फिर स्थिरता और विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दी है। अगर यही रुझान अंतिम नतीजों में बदलता है, तो यह नीतीश कुमार और एनडीए के लिए एक महत्वपूर्ण और निर्णायक जनादेश साबित होगा।












