अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय मूल के श्रद्धालु एम. रामलिंग राजू ने आस्था और सेवा की मिसाल पेश करते हुए तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) को 9 करोड़ रुपये का दान दिया है। यह दान विशेष रूप से पीएसी (पिलग्रिम अमेनिटी कॉम्प्लेक्स) भवनों के नवीनीकरण और तीर्थयात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं के आधुनिकीकरण के उद्देश्य से किया गया है। उनके इस उदार योगदान की व्यापक चर्चा हो रही है, क्योंकि इससे लाखों भक्तों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
टीटीडी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, एम. रामलिंग राजू लंबे समय से भगवान वेंकटेश्वर के प्रति गहरी आस्था रखते हैं और इससे पहले भी वे मंदिर प्रशासन को बड़ी राशि दान कर चुके हैं। वर्ष 2012 में उन्होंने 16 करोड़ रुपये का दान दिया था, जिसे मंदिर परिसर में विभिन्न विकास कार्यों और सेवा परियोजनाओं में उपयोग किया गया था। इस प्रकार कुल मिलाकर अब तक राजू द्वारा दिए गए दान की राशि 25 करोड़ रुपये से भी अधिक हो गई है।
टीटीडी के अध्यक्ष ने राजू के इस योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे दान न केवल मंदिर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं तक बेहतर सुविधाएं पहुंचाने में भी सहायक सिद्ध होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पीएसी भवन तीर्थयात्रियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यहीं से उनके ठहरने, प्रसाद वितरण, कतार प्रबंधन और विभिन्न सेवाओं का संचालन किया जाता है। नवीनीकरण के बाद यह परिसर अधिक आधुनिक, आरामदायक और सक्षम बनेगा।
अध्यक्ष ने आगे यह भी उम्मीद जताई कि भविष्य में भी राजू जैसे सेवाभावी लोग मंदिर और समाज के कल्याण के लिए आगे आते रहेंगे। उन्होंने कहा कि टीटीडी विभिन्न निर्माण, नवीनीकरण और सेवा संबंधी परियोजनाओं पर लगातार काम कर रहा है, जिनमें दानदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राजू जैसे भक्त मंदिर विकास में एक मजबूत सहयोगी के रूप में उभर रहे हैं।
एम. रामलिंग राजू ने दान देते समय कहा कि तिरुमाला उनके आध्यात्मिक जीवन का प्रमुख आधार है और भगवान वेंकटेश्वर की कृपा से वे समाज और मंदिर की सेवा कर पा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तीर्थयात्रियों की सुविधा बढ़ाना उनकी प्राथमिकता है और वे आगे भी योगदान देने के लिए तत्पर रहेंगे।
राजू के इस योगदान के बाद मंदिर प्रशासन ने उन्हें विशेष सम्मान भी प्रदान किया। भक्तों व स्थानीय समुदाय ने भी उनके इस कदम की सराहना की, क्योंकि इससे तिरुमाला आने वाले लाखों लोगों के अनुभव को और बेहतर बनाने में बड़ी मदद मिलेगी।












