अयोध्या में बुधवार का दिन इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज हो गया, जब श्रीरामजन्मभूमि मंदिर के शिखर पर विशेष ध्वजारोहण समारोह सम्पन्न हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल मंदिर निर्माण की पूर्णता का उत्सव था, बल्कि भारतीय सनातन परंपरा, राष्ट्रधर्म और सांस्कृतिक अस्मिता के पुनर्प्रतिष्ठा का सशक्त संदेश भी बनकर उभरा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर कहा कि यह ध्वजारोहण केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की आस्था व संघर्ष की विजय का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अयोध्याधाम में रामलला का भव्य मंदिर भारतीय संस्कृति की निरंतरता, धर्मनिष्ठा और राष्ट्रीय गौरव का प्रमाण है। यह समारोह दुनिया को यह संदेश देता है कि भारत अपनी परंपराओं, मूल्यों और इतिहास के प्रति सजग है तथा उन्हें सम्मानपूर्वक आगे बढ़ा रहा है।
कार्यक्रम में भारी संख्या में संत, विद्वान, रामभक्त और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और पारंपरिक संगीत के साथ ध्वजारोहण सम्पन्न हुआ, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्साहपूर्ण हो उठा। मंदिर के शिखर पर फहराया गया यह ध्वज रामभक्तों के लंबे इंतजार के बाद मिली आध्यात्मिक पूर्णता का प्रतीक माना जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या केवल धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की जीवंत धुरी है। उन्होंने इसे भारत की आध्यात्मिक धरोहर का हृदय बताया। मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि मंदिर निर्माण के साथ अयोध्या विश्वस्तरीय आध्यात्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रही है। शहर में आधुनिक सुविधाएं, बेहतर बुनियादी ढांचा और सांस्कृतिक स्थलों का तेजी से विकास जारी है, जिससे आने वाले वर्षों में यहां देश-विदेश से करोड़ों भक्त पहुंचेंगे।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं और संत समाज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सबके सहयोग और विश्वास से यह सपना साकार हुआ है। उन्होंने इसे भारतीय समाज की एकता, समरसता और धर्मनिष्ठ चेतना का प्रतिबिंब बताया।
अयोध्या में यह आयोजन ऐसे समय आया है जब मंदिर की गर्भगृह से लेकर शिखर तक की सभी प्रमुख निर्माण प्रक्रियाएँ पूर्णता की ओर हैं। रामलला के दर्शन के लिए देशभर से भक्तों का निरंतर आगमन जारी है और पूरे क्षेत्र में उत्सव का वातावरण है।












