नई दिल्ली, 16 फरवरी आदमी पार्टी ने एमसीडी आयुक्त की वित्तीय शक्तियां 5
करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये किए जाने के मुद्दे पर सदन में चर्चा नहीं कराने को लेकर भाजपा
पर तीखा हमला बोला है। निगम में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने आरोप लगाया कि सदन की बैठक
के दौरान जब इस विषय पर चर्चा की मांग की गई तो उपमहापौर ने एजेंडा जल्दबाजी में पारित कर
सदन स्थगित कर दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि सत्ता पक्ष बहस से बचना चाहता है।
अंकुश नारंग ने कहा कि इस निर्णय के बाद निगम आयुक्त को अब 50 करोड़ रुपये तक के प्रस्तावों
के लिए न तो स्थायी समिति और न ही सदन की स्वीकृति की आवश्यकता होगी। उन्होंने सवाल
उठाया कि जब महापौर, स्थायी समिति के अध्यक्ष और सदन में बहुमत भाजपा के पास है, तो चुने
हुए प्रतिनिधियों को दरकिनार कर अधिकारियों को इतनी बड़ी वित्तीय शक्ति देने की क्या आवश्यकता
थी। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय बिना एमसीडी अधिनियम में संशोधन किए प्रशासनिक आदेश
के माध्यम से लागू किया गया, जबकि अधिनियम की धारा 202 (सी) के अनुसार आयुक्त की
वित्तीय सीमा 5 करोड़ रुपये निर्धारित है। उनके अनुसार वित्तीय सीमा बढ़ाने के लिए विधायी प्रक्रिया
अपनाना आवश्यक था।
अंकुश नारंग ने कहा कि इस फैसले से पार्षदों की भूमिका औपचारिक होकर रह जाएगी और बड़े
प्रस्तावों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर भुगतान किए जाने की आशंका बढ़ेगी, जिससे पारदर्शिता
प्रभावित हो सकती है। उन्होंने विकास कार्यों में देरी के तर्क को भी खारिज करते हुए कहा कि पहले
भी प्रस्ताव नियमानुसार स्थायी समिति और सदन से पारित होते रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम एमसीडी को अफसरशाही के हवाले करने और भ्रष्टाचार को
बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया है। आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी कि इस निर्णय के विरोध
में सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन जारी रहेगा।












