नागपुर में बुधवार को हजारों किसान कर्ज माफी और फसल के उचित दाम की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। किसानों के इस अचानक प्रदर्शन से शहर के कई प्रमुख इलाकों में यातायात पूरी तरह ठप हो गया। सुबह से ही अंबाझरी रोड, सीताबर्डी और धरमपेठ इलाके में किसानों का हुजूम जमा होने लगा, जिसके कारण घंटों तक लंबा जाम लगा रहा। स्कूली बसों, एंबुलेंस और दफ्तर जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
किसानों का कहना है कि सरकार ने चुनाव से पहले कर्ज माफी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने का वादा किया था, लेकिन अब तक उस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। प्रदर्शनकारी किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं तो वे रेलवे ट्रैक पर उतरकर ट्रेनों को रोकने का आंदोलन करेंगे।
भारतीय किसान संघ और विदर्भ किसान संगठन के बैनर तले यह प्रदर्शन किया गया। किसान नेताओं ने कहा कि विदर्भ क्षेत्र में लगातार सूखा और घटते फसल मूल्य के कारण किसान आर्थिक संकट में हैं। सरकार की ओर से राहत पैकेज और ऋण माफी की घोषणा केवल कागजों तक सीमित रह गई है।
स्थिति को संभालने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने किसानों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की, वहीं प्रशासन ने किसानों के प्रतिनिधियों से वार्ता शुरू कर दी है।
जिला प्रशासन के मुताबिक, किसानों की प्रमुख मांगें मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा दी गई हैं। वहीं, किसान नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार लिखित में कर्ज माफी और MSP की गारंटी नहीं देती, आंदोलन जारी रहेगा। नागपुर में यह विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे पूरे विदर्भ क्षेत्र में फैलने की आशंका जताई जा रही है।
यह विरोध किसानों की बढ़ती नाराजगी को दर्शाता है, जो आने वाले दिनों में राज्य सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।












