प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ना तो छोटा सोचते हैं, ना छोटा करते हैं। स्पीड और स्केल अपने आप
में भिन्न होती है। कार्यों के परिणाम भी भिन्न होते हैं। प्रधानमंत्री जी के लक्ष्य भी भिन्न होते हैं।
प्रधानमंत्री जी कार्य शुरू करके उसको 100% तक पूरा करने का प्रयास करते हैं। यह बात बिल्कुल
सही है प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 2014 में जब से देश की सत्ता संभाली है, देश के स्थापित
लक्ष्यों को पीछे छोड़ते हुए जिस स्पीड और स्केल से कार्य किया है, रात दिन एक करके बिना विश्राम
लिए, वह किसी भी विश्लेषक को आश्चर्यचकित करने के लिए पर्याप्त है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी
जी की अगुवाई वाली सरकार ने हमेशा निर्णायक रूप से, अस्पष्टता की जगह काम को, बातों की
जगह सुधार को और लोक-लुभावन नीतियों की जगह लोगों को प्राथमिकता दी है।
सन् 2014 में प्रति व्यक्ति की आय 86647 रुपए सालाना थी, 2023 में बढ़कर 172000 रुपए
सालाना हो गई, 2026 में लगभग 2.5 लाख से 2.72 लाख रुपए सालाना के बीच तक पहुंचने का
अनुमान है, इस बीच में कोरोना जैसी वैश्विक महामारी का भी देश ने सामना किया। कोरोना के
बावजूद 2022-23 में प्रति व्यक्ति आय 172000 रुपए सालाना, मतलब लगभग 9 वर्षों में प्रति
व्यक्ति आय को दोगुना करने में, प्रधानमंत्री जी वैश्विक अनिश्चिताओं, वैश्विक उथल-पुथल, वैश्विक
महामारी के बाद भी 172000 रुपए सालाना आय के लक्ष्य प्राप्त करने में सफल रहे। यही प्रति
व्यक्ति आय 2024-2025 में 235000 रुपए सालाना तक पहुंच गई। यही प्रधानमंत्री जी की
अर्थनीति, स्पीड और स्केल है, यही मोदी जी का 13 वर्षों का बजट है।
2014-15 में प्रति व्यक्ति जीडीपी 98405 रुपए सालाना के लगभग थी, 2024-2025 में प्रति व्यक्ति
जीडीपी 234859 रुपए सालाना तक पहुंच गई। यही मोदी जी का 13 वर्षों का बजट है।
भारत का कुल निर्यात 2013-14 के दौरान 465 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर था जो 2024-2025
में भारत का कुल निर्यात 825.3 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंच गया। अर्थात् 11 वर्षों में भारत का
निर्यात 177.5 % की दर से सकारात्मक वृद्धि दर को प्राप्त किया। यही मोदी जी का 13 वर्षों का
बजट है। मंदी के दौरान भी भारत ने पर्याप्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया है। मोदी
सरकार के लगातार सुधारों एवं प्रयासों के परिणाम स्वरूप एफडीआई 2013-14 में लगभग 36 अरब
अमेरिकी डॉलर था। 2024-25 में 80 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया, 222.23 % की दर
से सकारात्मक वृद्धि दर को प्राप्त किया। जो निवेशकों के निरंतर विश्वास और सेवा, डिजिटल,
विनिर्माण एवं बुनियादी अवसंरचनात्मक क्षेत्रों में निवेश की तेज गति को दर्शाता है। यही प्रधानमंत्री
मोदी जी की अर्थनीति और 13 वर्षों बजट है।
2014 में हाई-स्पीड कॉरिडोर की लंबाई 550 किलोमीटर थी, वित्त वर्ष 2025-2026 में दिसंबर तक 5,
364 किलोमीटर हो गई है। लगभग दस गुना बढ़ गई है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी की स्पीड और
स्केल है। हवाई अड्डों की संख्या 2014 में 74 थी, 2025 में 164 हो गई है। भारत घरेलू विमानन
के क्षेत्र में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी की अर्थनीति है।
नवीकरणीय ऊर्जा तथा संस्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत मार्च 2014 में 76.38
गीगावॉट पर था, नवंबर 2025 तक 253.96 गीगावाट हो गई, वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है
और स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता में चौथे स्थान पर है। कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता पिछले दशक में
तीन गुना से अधिक बढ़ गई है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी की अर्थनीति है।
2014 में उच्च गति क्षमता वाली पटरियों की लंबाई 31, 445 किमी थी, 2025 तक लगभग दोगुनी
से भी ज्यादा होकर होकर 84, 244 किमी हो गई है, जिससे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क के लगभग 80%
हिस्से पर 110 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से परिचालन संभव हो पा रहा है। उद्योग को
समर्थन देना उद्योग को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है। इसलिए उच्च स्तरीय उच्च गति की रेल
कॉरिडोर का विकास औद्योगिक क्षेत्र के लिए विशेष सहायक होगा। प्रधानमंत्री मोदी जी ने सभी
महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र को हाई स्पीड रोड से जोड़ने का प्रयास किया है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी
की स्पीड और स्केल है।
रक्षा बजट 2013-14 में 2.53 लाख करोड़ रुपये था, वर्ष 2026-27 में 7.85 लाख करोड़ रुपये हो
गया है, अर्थात इसमें लगभग 5.32 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है, जो लगभग तीन गुना
वृद्धि को दर्शाता है। इस बढ़े हुए प्रावधान के माध्यम से, सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की
दिशा में रणनीतिक बदलाव के साथ सशस्त्र बलों और उनकी क्षमताओं को दुनिया के उच्चतम
मानकों में बदलने के अपने संकल्प की पुष्टि की है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में रुकावट और विदेशी
विक्रेताओं की तुलना में घरेलू आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने ने आयात प्रतिस्थापन की
आवश्यकता पर फिर से जोर दिया है और न केवल निर्वाह के लिए बल्कि भविष्य के आधुनिकीकरण
के लिए स्वदेशीकरण की ओर बढ़ रहा है। यही मोदी जी का बजट है।
13 सालों के बजट की चर्चा इसलिए भी आवश्यक है कि आज देश जिस स्थिति में खड़ा है उस
स्थिति को प्राप्त करने में कोई एक बजट महत्वपूर्ण नहीं है, आज की स्थिति जो भारत ने प्राप्त की
है इस स्थिति को प्राप्त करने के लिए मोदी जी को विरासत में मिला भारत और विरासत को मोदी
जी के द्वारा सजाया संवारा गया है। इन दोनों चीजों का परिणाम आज का वर्तमान भारत है और
भविष्य का भारत आज के भारत से आगे के भारत के लिए की गई तैयारी का परिणाम होगा।
मोदी जी भारत को तेज गति से आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। तेज गति को प्राप्त करने के लिए
आवश्यक सुधारों पर बल दिया गया है। सरकार के प्राथमिकताओं में परिवर्तन किया गया है। सरकार
ने युवा शक्ति को भविष्य का भारत बनाने के लिए तैयार करने डेवलप करने और नेतृत्व करने के
लिए रचनात्मक प्रयास किए हैं। राजकोषीय अनुशासन, सतत् विकास, मुद्रास्फीति की दर को कम
करने का शानदार प्रयास किया है। मोदी सरकार ने आत्मनिर्भरता को लक्ष्य मान करके घरेलू उत्पादन
क्षमता को बढ़ाने का प्रयास किया है। ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास किया है। मेक
इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों को चला करके आयात पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया है। सरकार
की पूरी अर्थनीति का अगर विश्लेषण करेंगे तो उसके केंद्र बिंदुओं में सरकार का लक्ष्य आत्मनिर्भरता,
रोजगारसृजन, कृषि उत्पादन क्षमता का विकास, नागरिकों की क्रय शक्ति का बढ़ना, नागरिकों के
जीवन स्थान में सुधार लाना अपनाया गया है। सरकार ने 7% उच्च वृद्धि दर को सुनिश्चित करके
गरीबी घटाने और नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के प्रयासों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की
है।
जो देश कृषि उत्पादों को आयात करता था, अनाज की कमी से जुझता था, आज वही देश ढाई लाख
करोड़ रुपए से अधिक के कृषि उत्पादों को निर्यात करता है, कितना फर्क है, सरकार की अर्थ नीति
कर्तव्य नीति ज्यादा दिखाई देती है। जिसके चलते सरकार ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर
निकलने में सफलता प्राप्त की है।
इसलिए मोदी सरकार के बजट में, मोदी सरकार की अर्थनीति में, स्पीड और स्केल में, हर क्षेत्र की
तरफ, नभ, जल और आकाश सभी तरफ नए कीर्तिमान स्थापित होते दिखते हैं। क्योंकि हमारे पूर्व
की क्षमताओं से हम एक नए स्तर पर आ गए हैं। मोदी सरकार का लक्ष्य तो इससे कहीं ऊपर है।
देश को वापस अपना खोया हुआ गौरव हासिल करना है। देश को विश्व की अर्थव्यवस्था में अपनी
हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है। इसीलिए भारत विश्व का ग्लोबल ग्रोथ इंजन है। कोई भी इस विकास
की दौड़ में पीछे ना छूटे, कोई भी विकास की भागीदारी में रह ना जाए, समग्र विकास के साथ-साथ
समग्र दृष्टिकोण केवल भाजपा सरकार, प्रधानमंत्री मोदी जी ही कर सकते हैं।
(लेखक सीए व भाजपा मप्र के प्रदेश कोषाध्यक्ष हैं)
(यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है)











