छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान के तहत एक बड़ी सफलता मिली है। राज्य के उत्तरी बस्तर क्षेत्र में स्थित अबुझमाड़ इलाके में 208 नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटते हुए पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में 110 महिलाएं और 98 पुरुष शामिल हैं। इन सभी नक्सलियों ने कुल 153 हथियार पुलिस के हवाले किए हैं। यह घटना राज्य में लंबे समय से जारी नक्सली हिंसा पर लगाम लगाने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली अबुझमाड़ और उसके आसपास के घने जंगलों में सक्रिय थे। इनमें से कई पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे और ये सुरक्षा बलों के लिए लगातार चुनौती बने हुए थे। बताया गया है कि इन नक्सलियों ने सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया। उन्हें समझाया गया कि मुख्यधारा में लौटकर वे समाज और परिवार के साथ सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं।
राज्य के पुलिस महानिदेशक ने इस सामूहिक आत्मसमर्पण को लाल आतंक के खात्मे की दिशा में निर्णायक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह सफलता सुरक्षा बलों के सतत प्रयास, जनजागरण अभियानों और स्थानीय प्रशासन की पहल का परिणाम है। आत्मसमर्पण करने वालों को पुनर्वास योजना के तहत आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे ताकि वे समाज में फिर से अपनी पहचान बना सकें।
छत्तीसगढ़ सरकार ने इसे शांति और विकास की दिशा में बड़ा मोड़ करार दिया है। अबुझमाड़, जो वर्षों से नक्सल गतिविधियों का गढ़ माना जाता रहा है, अब धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है। इस आत्मसमर्पण से स्थानीय लोगों में भी उम्मीद जगी है कि क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास का नया अध्याय शुरू होगा।
यह सामूहिक आत्मसमर्पण न केवल सुरक्षा बलों के मनोबल को बढ़ाने वाला कदम है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है।












