राजस्थान के जैसलमेर जिले में रविवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। एक यात्री बस में अचानक लगी आग ने देखते ही देखते भीषण रूप ले लिया, जिसमें अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई यात्री गंभीर रूप से झुलस गए हैं। हादसा इतना भयानक था कि कई शवों की पहचान तक नहीं हो सकी है।
मिली जानकारी के अनुसार, यह बस महज पांच दिन पहले ही खरीदी गई थी और इसे पहली बार लंबी दूरी के रूट पर चलाया जा रहा था। बताया जा रहा है कि बस जैसलमेर से जोधपुर की ओर जा रही थी, तभी रास्ते में अचानक उसमें से धुआं उठने लगा। चालक ने बस को रोकने और यात्रियों को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन आग इतनी तेजी से फैली कि ज्यादातर लोग बाहर नहीं निकल पाए।
स्थानीय लोगों ने तुरंत दमकल विभाग को सूचना दी और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीमों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक बस पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी। पुलिस और प्रशासन ने घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया है, जहां कई की हालत नाजुक बताई जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बस में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी होगी, हालांकि वास्तविक कारणों की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित कर दी गई है। जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने घटना पर गहरा शोक जताया है और मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तथा घायलों के निःशुल्क इलाज की घोषणा की है।
जैसलमेर अग्निकांड ने एक बार फिर बस सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पांच दिन पहले खरीदी गई नई बस में हुई यह भयावह दुर्घटना न केवल लापरवाही की ओर इशारा करती है बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न उठाती है। पूरे इलाके में शोक की लहर है और लोग इस दर्दनाक हादसे से स्तब्ध हैं।












