राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने आखिरकार पहली बार अपने परिवार के भीतर चल रहे विवाद पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। हाल ही में तेजस्वी यादव और उनकी बहन रोहिणी आचार्या के बीच सोशल मीडिया पर सामने आए मतभेदों ने राजनीतिक हलकों समेत पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी कई सवाल खड़े कर दिए थे। इस पूरे मामले पर अब लालू यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी को इससे दूर रहना चाहिए और यह मामला परिवार के बीच ही सुलझाया जाएगा।
राजद नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक में लालू यादव ने कहा, यह हमारे घर का मामला है। हम इसे घर में ही सुलझाएंगे। मैं खुद इसे निपटाने के लिए मौजूद हूं, इसलिए किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में मौजूद नेताओं को इस विषय पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान न देने की भी हिदायत दी गई।
लालू यादव का यह बयान ऐसे समय आया है जब तेजस्वी यादव बिहार की राजनीति में अपनी सक्रियता को लगातार बढ़ा रहे हैं और पार्टी के प्रमुख चेहरे के रूप में उभर चुके हैं। दूसरी ओर, रोहिणी आचार्या सोशल मीडिया पर अपने बेबाक तेवर और राजनीतिक मुद्दों पर अपने विचार साझा करने के लिए जानी जाती हैं। पिछले कुछ दिनों से दोनों के बीच कथित विवाद सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ था, जिससे राजद के भीतर असहजता बढ़ गई थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, रोहिणी ने कुछ व्यक्तिगत और राजनीतिक टिप्पणियाँ की थीं, जिनके बाद यह विवाद और गहरा गया। हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि परिवार के अंदर ऐसे मतभेद होना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन जब यह सार्वजनिक हो जाए, तो विपक्ष इसे मुद्दा बना लेता है। इसी कारण लालू यादव ने तुरंत हस्तक्षेप करने का निर्णय लिया।
पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि लालू यादव ने अपने नेताओं को कहा कि राजद एक बड़े परिवार की तरह काम करती है और परिवार में ऐसे छोटे-मोटे मतभेद स्वाभाविक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले महीनों में राजनीति बेहद सक्रिय होने वाली है और ऐसे समय में पार्टी को मजबूत और एकजुट रहना आवश्यक है।
लालू के इस हस्तक्षेप को पार्टी कार्यकर्ता राहत के तौर पर देख रहे हैं। उनका मानना है कि लालू यादव का नेतृत्व और उनका राजनीतिक अनुभव ऐसे किसी भी विवाद को जल्दी शांत करा सकता है। वहीं, जनता और राजद समर्थकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या तेजस्वी और रोहिणी जल्द ही किसी तरह का सार्वजनिक बयान देकर स्थिति स्पष्ट करेंगे।
कुल मिलाकर, लालू यादव के इस रुख से यह साफ हो गया है कि वे पार्टी में किसी भी तरह की दरार नहीं आने देना चाहते। उन्होंने अपना पारंपरिक राजनीतिक कौशल दिखाते हुए परिवार और पार्टी दोनों को एक संदेश दे दिया है कि एकजुटता ही राजद की सबसे बड़ी ताकत है।











