बिहार की राजनीति इन दिनों दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। शनिवार को एयरपोर्ट पर राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव तथा भारतीय जनता पार्टी के सांसद और फिल्म अभिनेता रवि किशन की अप्रत्याशित मुलाकात ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। दोनों नेताओं के बीच कुछ देर चली बातचीत ने राजनीतिक हलकों में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिहार की सियासत में कोई नया समीकरण बनने की तैयारी है।
सूत्रों के अनुसार, यह मुलाकात पटना एयरपोर्ट पर हुई जब तेज प्रताप यादव और रवि किशन दोनों एक ही समय पर वहां पहुंचे। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का गर्मजोशी से अभिवादन किया और कुछ मिनटों तक बातचीत की। हालांकि यह बातचीत औपचारिक लग रही थी, लेकिन उपस्थित लोगों के अनुसार उनके बीच माहौल काफी सौहार्दपूर्ण था। किसी ने जब पूछा कि यह मुलाकात राजनीतिक थी या संयोगवश, तो दोनों नेताओं ने मुस्कुराते हुए कहा कि हम कलाकार हैं, राजनीति में भी दोस्ती जरूरी है।
तेज प्रताप यादव ने बाद में मीडिया से बातचीत में कहा, रवि किशन मेरे पुराने मित्र हैं। हम दोनों का एक पुराना रिश्ता है, राजनीति से ऊपर उठकर हम एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। वहीं रवि किशन ने भी इस मुलाकात को सौहार्दपूर्ण बताते हुए कहा कि तेज प्रताप एक युवा नेता हैं, उनसे मिलना हमेशा अच्छा लगता है।
हालांकि, राजनीतिक जानकार इस मुलाकात को महज संयोग नहीं मान रहे। उनका कहना है कि बिहार में बदलते राजनीतिक समीकरणों और आगामी चुनावों को देखते हुए इस तरह की मुलाकातों के पीछे गहरे अर्थ हो सकते हैं। विशेषकर तब, जब राष्ट्रीय स्तर पर भी गठबंधन की राजनीति नई दिशा ले रही है।
RJD और BJP के बीच विचारधारात्मक दूरी हमेशा से रही है, लेकिन तेज प्रताप यादव की स्वतंत्र राजनीतिक शैली और रवि किशन की फिल्मी पृष्ठभूमि दोनों को एक साझा मंच पर लाने की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। तेज प्रताप पहले भी अपने बयानों और अलग अंदाज के कारण चर्चा में रहे हैं, जबकि रवि किशन का बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मजबूत जनाधार है।
इस मुलाकात ने RJD और BJP दोनों खेमों में हलचल मचा दी है। कुछ नेताओं ने इसे सिर्फ औपचारिक मुलाकात बताया है, जबकि कुछ का मानना है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में कुछ “बड़ा और अप्रत्याशित देखने को मिल सकता है।
फिलहाल, दोनों नेताओं ने किसी भी राजनीतिक गठजोड़ की संभावना से इनकार किया है, लेकिन बिहार की सियासत में कहा जाता है ,यहां कुछ भी असंभव नहीं। ऐसे में यह मुलाकात आने वाले दिनों में किस रूप में असर डालेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।











