राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर जहरीली हवा की गिरफ्त में आ गई है। ठंडी हवाओं के साथ छाया घना स्मॉग लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। मौसम विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, शहर के अधिकांश इलाकों में वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंच चुकी है। बवाना, वजीरपुर और आईटीओ जैसे इलाकों में तो एयर क्वालिटी इंडेक्स 350 के पार दर्ज किया गया है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक स्तर माना जाता है।
ठंड बढ़ने के साथ दिल्ली की हवा में नमी और प्रदूषक कणों का जमाव बढ़ गया है। हवा की गति धीमी होने के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में फंसे रह गए हैं, जिससे स्मॉग की परत और घनी हो गई है। सुबह और शाम के समय दृश्यता बेहद कम हो रही है, जिससे यातायात पर भी असर पड़ा है। कई जगहों पर वाहन चालकों को धुंध के कारण हेडलाइट जलाकर चलना पड़ रहा है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अपने अपडेट में बताया है कि आने वाले कुछ दिनों तक हवा की गति कम रहने और तापमान में गिरावट के चलते प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है। विभाग का कहना है कि उत्तर-पश्चिमी हवाओं के धीमे पड़ने से प्रदूषक तत्व दिल्ली-एनसीआर के ऊपर टिके हुए हैं। राहत तभी मिलेगी जब तेज हवाएं चलेंगी या बारिश होगी।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के आंकड़ों के मुताबिक, बवाना, वजीरपुर, आनंद विहार, आईटीओ और रोहिणी जैसे औद्योगिक और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में हालात सबसे खराब हैं। यहां AQI 350 से 400 के बीच रिकॉर्ड किया गया है। वहीं, दक्षिण दिल्ली के कुछ हिस्सों में यह 280 से 300 के बीच है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस स्तर का प्रदूषण सांस की बीमारियों, खांसी, गले में जलन और आंखों में खुजली जैसी समस्याएं बढ़ा सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि इस समय मास्क पहनना और घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का उपयोग करना बेहद जरूरी है।
दिल्ली सरकार ने जनता से वाहनों का कम इस्तेमाल करने, निर्माण कार्यों को सीमित रखने और पराली जलाने से परहेज करने की अपील की है। साथ ही ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के तहत सख्त कदम लागू किए गए हैं। स्कूलों में आउटडोर गतिविधियों को भी अस्थायी रूप से रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगले हफ्ते तक हवाओं की दिशा और गति में सुधार नहीं हुआ, तो दिल्ली की हवा ‘बेहद गंभीर’ श्रेणी में जा सकती है। फिलहाल राजधानी एक बार फिर उस मुश्किल दौर में है जब सांस लेना भी चुनौती बन गया है।











