दीपावली से पहले पूरे देश में दीपोत्सव की धूम मची हुई है। मंदिरों, गलियों और घरों में रोशनी की सजावट शुरू हो चुकी है। अयोध्या से लेकर वाराणसी, जयपुर, उज्जैन, अमृतसर और दिल्ली तक दीपों की झिलमिलाहट ने त्योहारी माहौल को और भी मनमोहक बना दिया है। हर जगह लोगों में उत्साह और उमंग देखने को मिल रहा है।
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में सबसे बड़ा दीपोत्सव आयोजित किया जा रहा है। सरयू तट पर लाखों दीयों से जगमगाते घाटों ने पूरे शहर को स्वर्ग जैसा रूप दे दिया है। राम जन्मभूमि परिसर, हनुमानगढ़ी और कनक भवन को फूलों और लाइटों से सजाया गया है। स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग ने सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्थाएं की हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस बार अयोध्या में विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए 25 लाख दीये जलाए जा रहे हैं।
वाराणसी में गंगा घाटों पर “देव दीपावली” की तैयारियां जोरों पर हैं। यहां घाटों की सफाई और रोशनी के साथ रंगोली और सजावट का काम तेजी से चल रहा है। श्रद्धालु दीपदान करने के लिए बड़ी संख्या में घाटों पर पहुंच रहे हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर को भी विशेष रोशनी से सजाया गया है।
इसी तरह राजस्थान के जयपुर, मध्य प्रदेश के उज्जैन, गुजरात के अहमदाबाद और महाराष्ट्र के नासिक में भी दीपोत्सव मनाने की परंपरा शुरू हो गई है। लोग घरों की रंगाई-पुताई में जुटे हैं, बाजारों में दीयों, मिठाइयों, कपड़ों और सजावट के सामानों की खरीददारी से रौनक बढ़ गई है।
दिल्ली और मुंबई में भी दीपोत्सव कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। कई सामाजिक संस्थाएं गरीब परिवारों में मिठाइयां और कपड़े बांटकर त्योहारी खुशी साझा कर रही हैं।
दीपोत्सव केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। दीपावली से पहले मनाया जा रहा यह उत्सव पूरे देश को एकता, प्रेम और प्रकाश के सूत्र में पिरो देता है। लोगों की यही भावना इस पर्व को खास बनाती है।












