बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जनता दल के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका सामने आया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद संतोष कुशवाह ने जेडीयू को अलविदा कहकर राष्ट्रीय जनता दल RJD का दामन थाम लिया है। उनके आरजेडी में शामिल होने से न केवल नीतीश कुमार की सियासी रणनीति पर असर पड़ेगा, बल्कि यह कदम पार्टी के अंदर असंतोष के संकेत भी दे रहा है।
पटना में RJD के प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में संतोष कुशवाह ने तेजस्वी यादव की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान तेजस्वी यादव ने उन्हें पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि, RJD में हर उस नेता का स्वागत है जो सामाजिक न्याय और विकास की राजनीति में विश्वास रखता है।” उन्होंने दावा किया कि कुशवाह के आने से पार्टी को उत्तर बिहार और सीमांचल क्षेत्रों में नई ताकत मिलेगी।
वहीं, JDU से इस्तीफा देते हुए संतोष कुशवाह ने नीतीश कुमार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा किअब JDU अपनी मूल विचारधारा से भटक चुकी है। पार्टी में कार्यकर्ताओं की कोई सुनवाई नहीं होती, फैसले कुछ लोगों तक सीमित हो गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें उम्मीद है कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में बिहार में एक नई राजनीतिक सोच और ऊर्जा का संचार होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संतोष कुशवाह का RJD में शामिल होना, खासकर कुशवाहा समाज के वोट बैंक पर असर डाल सकता है, जो पारंपरिक रूप से जेडीयू के साथ रहा है। चुनाव से ठीक पहले इस कदम ने JDU की अंदरूनी कमजोरियों को उजागर कर दिया है।
दूसरी ओर, JDU प्रवक्ताओं ने इस कदम को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि JDU मजबूत संगठन है और एक व्यक्ति के जाने से इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
हालांकि, राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि JDU के कई पुराने नेता पार्टी से असंतुष्ट हैं और आने वाले दिनों में और भी नाम आरजेडी या अन्य दलों का रुख कर सकते हैं। ऐसे में बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है, और इस घटनाक्रम ने नीतीश कुमार की चुनावी रणनीति को नई चुनौती दे दी है।












