पीएम मोदी ने कहा कि एआई प्रशिक्षण में डेटा संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए और यह एक
विश्वसनीय वैश्विक डेटा ढांचे पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने ‘जैसा इनपुट वैसा आउटपुट’ के सिद्धांत
पर प्रकाश डाला और इस बात पर बल दिया कि यदि डेटा सुरक्षित, संतुलित और विश्वसनीय नहीं है, तो
आउटपुट भरोसेमंद नहीं हो सकता।
एआई प्लेटफॉर्म को अपने सुरक्षा नियमों को स्पष्ट और पारदर्शी रखना चाहिए। उन्होंने ‘ब्लैक बॉक्स’ के
बजाय ‘ग्लास बॉक्स’ दृष्टिकोण अपनाने की बात कही, जहां सुरक्षा नियम स्पष्ट और सत्यापित किए जा
सकें। उन्होंने कहा कि इससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी और व्यापार में नैतिक व्यवहार मजबूत होगा।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता को स्पष्ट मानवीय मूल्यों द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए। उन्होंने ‘पेपर क्लिप
समस्या’ का उदाहरण दिया, जिसमें एक मशीन को एक लक्ष्य दिया जाए तो वह उसे प्राप्त करने के लिए
दुनिया के सभी संसाधनों का उपयोग कर सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि
प्रौद्योगिकी शक्तिशाली है, फिर भी दिशा का निर्धारण हमेशा मनुष्यों द्वारा ही किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि महत्वाकांक्षी भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता की वैश्विक यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा
सकता है और इस जिम्मेदारी को समझते हुए भारत महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। उन्होंने बताया कि
भारत के एआई मिशन के तहत 38,000 जीपीयू पहले से ही उपलब्ध हैं और अगले छह महीनों में
24,000 और जीपीयू जोड़े जाएंगे। पीएम मोदी ने कहा कि भारत अपने स्टार्टअप्स को विश्व स्तरीय
कंप्यूटिंग क्षमता अत्यंत किफायती दरों पर उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने
एआईकोश (राष्ट्रीय डेटासेट प्लेटफॉर्म) की स्थापना की है, जिसके माध्यम से 7,500 से अधिक डेटासेट
और 270 एआई मॉडल राष्ट्रीय संसाधनों के रूप में साझा किए गए हैं।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के लिए भारत की दिशा और
दृष्टिकोण स्पष्ट हैं—एआई मानवता के कल्याण के लिए एक साझा संसाधन है। उन्होंने नवाचार को
बढ़ावा देने, समावेश को मजबूत करने और मानवीय मूल्यों को एकीकृत करने वाले एआई भविष्य के
निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। मोदी ने निष्कर्ष निकाला कि जब प्रौद्योगिकी और मानवीय
विश्वास साथ-साथ आगे बढ़ेंगे, तभी एआई का वास्तविक प्रभाव विश्व भर में दिखाई देगा।












