प्रवर्तन निदेशालय ED ने कोयला माफिया से जुड़े कथित घोटालों पर बड़ी कार्रवाई शुरू करते हुए गुरुवार सुबह झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में एक साथ छापेमारी की। एजेंसी ने झारखंड में 18 और पश्चिम बंगाल में 24 अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी अभियान शुरू किया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, ये छापे कोयला खनन, अवैध खनन से होने वाली कमाई के हेराफेरी, हवाला लेन-देन और राजनीतिक-प्रशासनिक संरक्षण से जुड़े आपराधिक नेटवर्क की जांच का हिस्सा हैं।
ED के सूत्रों ने बताया कि जांच के दौरान अब तक भारी-भरकम लेन-देन, फर्जी बिलिंग, बोगस कंपनियों के जरिए फंड ट्रांसफर और मनी लॉन्ड्रिंग के कई प्राथमिक सुबूत सामने आए थे। माना जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क में कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका की भी जांच हो रही है। एजेंसी का दावा है कि अवैध कोयला खनन से जुड़े इस मामले में सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है। इसी के आधार पर छापेमारी के दायरे को और बढ़ाया गया है।
सुबह से शुरू हुए इस अभियान में रांची, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह सहित झारखंड के कई खनन प्रभावित क्षेत्रों में कार्रवाई की जा रही है। वहीं पश्चिम बंगाल में आसनसोल, दुर्गापुर, कोलकाता और बीरभूम सहित कई स्थानों पर एक साथ दबिश दी गई है। ईडी की टीमों के साथ स्थानीय पुलिस भी मौजूद है, ताकि सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया बिना बाधा पूरी हो सके। कई ठिकानों से लैपटॉप, कंप्यूटर डेटा, बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज, पासबुक, संपत्ति के कागजात और संदिग्ध लेन-देन के रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, एजेंसी ने पिछले कुछ वर्षों में अवैध कोयला खनन और परिवहन से जुड़े नेटवर्क पर कई बार कार्रवाई की है। इस मामले में सीबीआई भी पहले से जांच कर रही है, और ED की कार्रवाई उन्हीं मामलों से उत्पन्न मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से संबंधित है। माना जा रहा है कि कुछ खनन क्षेत्रों में लंबे समय से सक्रिय गिरोहों ने पुलिस, प्रशासन और राजनीतिक संरक्षण के जरिए एक समानांतर अर्थतंत्र खड़ा कर लिया था, जिससे सरकारी खजाने तक राजस्व पहुंच ही नहीं पा रहा था।
छापेमारी के दौरान कुछ कारोबारी, ट्रांसपोर्टर और कोयला बिचौलियों से पूछताछ भी की जा रही है। ED अधिकारियों का कहना है कि तलाशी अभियान पूरा होने के बाद जब्त दस्तावेजों का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जाएगा, और इसके आधार पर आगे गिरफ्तारियां भी संभव हैं। एजेंसी ने यह भी संकेत दिया है कि इस सिंडिकेट में शामिल कुछ बड़े नामों का खुलासा जल्द हो सकता है।
ED की इस ताजा कार्रवाई ने झारखंड और बंगाल दोनों राज्यों के राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है, जबकि सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह सबूतों पर आधारित है और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा है।
फिलहाल ED की छापेमारी जारी है और कई स्थानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है। माना जा रहा है कि यह ऑपरेशन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।












