फरीदाबाद/चंडीगढ़, 16 फरवरी में लाल किले के पास कार विस्फोट प्रकरण के
बाद सुर्खियों में आई फरीदाबाद के अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने पंजाब
हरियाणा हाईकोर्ट में हरियाणा निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) अधिनियम 2025 की संवैधानिक
वैधता को चुनौती दी है। अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस जारी
करके जवाब मांग लिया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार ने संशोधन के जरिये असीमित और मनमाने
अधिकार अपने हाथ में ले लिए हैं, जो निजी और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के अस्तित्व के लिए
खतरा पैदा करते हैं। याचिका का मुख्य आधार संशोधित अधिनियम में जोड़ी गई नई धाराएं 44बी
और 46 हैं, जिन्हें छह जनवरी 2025 को लागू किया गया।
इन संशोधित प्रावधानों के तहत हरियाणा सरकार को गंभीर चूक या राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक
व्यवस्था तथा कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के आधार पर किसी भी निजी विश्वविद्यालय के
प्रबंधन और नियंत्रण को अपने हाथ में लेने के लिए प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन प्रविधानों में प्रयुक्त शब्दावली अस्पष्ट और व्यापक है, जिससे
सरकार को अत्यधिक विवेकाधीन शक्ति मिल जाती है। याचिका में यह भी कहा गया है कि संशोधन
के तहत सरकार सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद भी विश्वविद्यालय पर नियंत्रण बनाए रख
सकती है, जिससे निजी विश्वविद्यालय स्थायी रूप से सरकारी संस्थानों में बदल सकते हैं।
ट्रस्ट व यूनिवर्सिटी की ओर से इसे संविधान के अनुच्छेद 30 का सीधा उल्लंघन बताया गया है, जो
अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थान स्थापित और संचालित करने का अधिकार प्रदान करता है।
ट्रस्ट के अनुसार विश्वविद्यालय और राज्य सरकार के बीच विवाद उस समय बढ़ा जब 10 नवंबर
2025 को दिल्ली में हुए बम विस्फोट मामले में विश्वविद्यालय के चार संकाय सदस्यों के इसमें
शामिल होने की बात सामने आई। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को
जवाब दायर करने का आदेश दिया है।












