बंगाल–बांग्लादेश सीमा पर हालात हाल के दिनों में काफी बदल गए हैं। SIR की घोषणा के बाद से बड़ी संख्या में अवैध घुसपैठिए प्रतिदिन सीमा पार करके वापस बांग्लादेश लौटने की कोशिश कर रहे हैं। इससे न सिर्फ सीमा सुरक्षा बल के लिए चुनौतियाँ बढ़ी हैं, बल्कि सीमावर्ती गांवों में भी असामान्य हलचल देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगों और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में घुसपैठियों की संख्या में अचानक वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी कर दी गई है।
बांग्लादेश की सीमा से लगे मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना, कूचबिहार और नादिया जैसे जिलों में इन दिनों सुरक्षा एजेंसियाँ चौबीसों घंटे निगरानी में लगी हैं। BSF अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर की घोषणा के बाद अवैध रूप से भारत में रह रहे कई लोग आशंकित हैं। उन्हें डर है कि उनकी पहचान सार्वजनिक होने या सत्यापन के दौरान पकड़े जाने पर उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है। इसी वजह से ये लोग सुरक्षित रास्तों से वापस अपने देश लौटने की कोशिश में जुटे हैं।
बीएसएफ के सूत्र बताते हैं कि कुछ क्षेत्रों में रात के अंधेरे का फायदा उठाकर समूहों में लोग सीमा पार करने की कोशिश कर रहे हैं। कई जगहों पर दलदली क्षेत्र और नदी किनारे के रास्ते होने के कारण इन गतिविधियों को रोकने में अतिरिक्त मुश्किलें आ रही हैं। हालांकि सुरक्षा बलों ने ऐसी सभी संवेदनशील जगहों पर पेट्रोलिंग बढ़ा दी है और हाई-टेक निगरानी उपकरण भी लगाए जा रहे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि पिछले सप्ताह की तुलना में इस सप्ताह सीमा के आसपास लोगों की आवाजाही असामान्य रूप से बढ़ी है। कई गांवों में बाहरी लोगों की उपस्थिति को लेकर लोग सतर्क हैं और बीएसएफ को लगातार सूचना दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ होती रही है, लेकिन इस बार लौटने वालों की संख्या अधिक है, जिससे माहौल में चिंता बढ़ गई है।
सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि एसआईआर लागू होने के बाद अवैध निवासियों पर निगरानी और कड़ी हो जाएगी। ऐसे में जो लोग वर्षों से बिना पहचान दस्तावेज भारत में रह रहे थे, वे खतरा महसूस कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह स्थिति अस्थायी हो सकती है, लेकिन जब तक पहचान प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, सीमा क्षेत्रों में घुसपैठ की घटनाएँ बढ़ती रह सकती हैं।
बंगाल सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला अधिकारियों और पुलिस को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार का कहना है कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, बीएसएफ ने स्पष्ट किया है कि सीमा पार करने की किसी भी कोशिश को सख्ती से रोका जाएगा।
हालांकि अभी तक किसी बड़े हादसे या हिंसा की खबर नहीं है, लेकिन लगातार बढ़ रही घुसपैठियों की भीड़ ने सुरक्षा एजेंसियों को नई रणनीतियाँ अपनाने पर मजबूर कर दिया है। आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार होगा या और गंभीरता आएगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि एसआईआर की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है और लोग इसे कितनी गंभीरता से लेते हैं। कुल मिलाकर, बंगाल की सीमा पर इस समय हाई अलर्ट की स्थिति है और सुरक्षा बल किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।












