जयपुर, 11 फरवरी राजस्थान के अलवर जिले को ऑल-सीजन टूरिज्म हब बनाने की
रणनीति के तहत सरिस्का और इसके आस-पास मौजूद झीलों व वेटलैंड्स को बर्ड सेंट्रिक टूरिज्म के रूप
में विकसित किया जा रहा है। सिलीसेढ़ झील को रामसर साइट घोषित किए जाने के बाद इस क्षेत्र में
प्रकृति और पक्षी प्रेमियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
यह झील अब सिर्फ पिकनिक स्पॉट नहीं, बल्कि देशी-विदेशी प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित ठिकाना बन
चुकी है। सिलीसेढ़ झील की सफलता से प्रेरित होकर प्रशासन सरिस्का के अन्य जलस्रोतों को भी रामसर
साइट का दर्जा दिलाने की दिशा में प्रयास कर रहा है, ताकि इन क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिले और
ईको-टूरिज्म को नया आयाम मिल सके। भरतपुर के केवलादेव घना पक्षी विहार की तरह सरिस्का को भी
बर्ड टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने की योजना बनाई जा रही है।
सरिस्का के करना का बास, मंगलसर, मानसरोवर बांध, कांकबाड़ी फोर्ट के आसपास के वेटलैंड और
सिलीसेढ़ झील जैसे क्षेत्र तेजी से बर्ड वॉचिंग हॉटस्पॉट बनते जा रहे हैं। सर्दियों में सरिस्का की सुंदरता
दोगुनी हो जाती है जब साइबेरिया, यूरोप और मध्य एशिया से आने वाले प्रवासी परिंदे यहां डेरा डालते
हैं। सुरक्षित वातावरण, शांत प्राकृतिक स्थलों और खाद्य की उपलब्धता के कारण यह क्षेत्र अब एक
संभावित ब्रीडिंग साइट के रूप में भी उभर रहा है। इससे न केवल पक्षियों की संख्या बढ़ रही है, बल्कि
पर्यटकों को बेहतर बर्ड साइटिंग का अनुभव भी मिल रहा है। सरिस्का में बाघों की बढ़ती संख्या ने जिस
तरह टाइगर टूरिज्म को मजबूती दी, उसी प्रकार परिंदों की बढ़ती मौजूदगी बर्ड सेंट्रिक टूरिज्म की दिशा
में नया द्वार खोल रही है। इससे बर्ड वॉचिंग, नेचर फोटोग्राफी और ईको-टूरिज्म के शौकीनों के लिए
सरिस्का एक आकर्षक विकल्प बनता जा रहा है। यह न सिर्फ पर्यटन सीजन को लंबा करेगा, बल्कि
स्थानीय रोजगार और पर्यटन गतिविधियों में भी बढ़ोतरी करेगा।
सिलीसेढ़ झील पर आयोजित होने वाला पहला बर्ड फेस्टिवल इस क्षेत्र की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण
है। सरिस्का और सिलीसेढ़ झील में लगभग 57 प्रवासी पक्षियों सहित 250 से अधिक प्रजातियों के पक्षी
देखे जाते हैं, जो इसे प्रकृति प्रेमियों का स्वर्ग बना देते हैं। बर्ड सेंट्रिक टूरिज्म के विकास के बाद सरिस्का
अब सिर्फ टाइगर रिजर्व नहीं, बल्कि एक मल्टी-डायमेंशनल टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है,
जहां जंगल, पक्षी और प्रकृति मिलकर अद्भुत अनुभव प्रदान करते हैं। अलवर का सरिस्का टाइगर रिजर्व
अब केवल बाघों के संरक्षण और टाइगर सफारी के लिए ही प्रसिद्ध नहीं रह गया है, बल्कि परिंदों की
दुनिया के लिए भी तेजी से एक नए आकर्षण केंद्र के रूप में उभर रहा है।












