बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में लोकतंत्र के पर्व में जनता ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए फाइनल आंकड़ों के अनुसार, पहले चरण में 65.27 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। आयोग ने बताया कि यह आंकड़ा 2020 के विधानसभा चुनाव की तुलना में करीब 3 प्रतिशत अधिक है, जो मतदाताओं की बढ़ती राजनीतिक जागरूकता और लोकतंत्र के प्रति विश्वास को दर्शाता है।
पहले चरण में कुल 121 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ। इनमें सीमांचल, मिथिलांचल और मगध क्षेत्र की कई अहम सीटें शामिल थीं। सुबह 7 बजे मतदान शुरू हुआ और शाम 6 बजे तक मतदाताओं की लंबी कतारें पोलिंग बूथों पर दिखाई दीं। कई बूथों पर निर्धारित समय के बाद भी मतदान जारी रहा क्योंकि मतदाता मतदान केंद्रों के अंदर मौजूद थे।
आयोग के अनुसार, महिलाओं ने इस बार मतदान में पुरुषों से अधिक भागीदारी दिखाई। महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 66.8 प्रतिशत रहा, जबकि पुरुषों का 64.1 प्रतिशत। यह रुझान बिहार में लगातार देखने को मिल रहा है कि महिलाएं मतदान में पुरुषों से आगे हैं। चुनाव आयोग ने इसे लोकतंत्र की ताकत का सशक्त प्रतीक बताया।
पहले चरण में सबसे अधिक मतदान गया, नवादा, औरंगाबाद, जमुई, बांका, भागलपुर और कटिहार जिलों में दर्ज किया गया। वहीं, कुछ शहरी सीटों जैसे पटना साहिब और बक्सर में मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा। आयोग ने बताया कि कुछ जगहों पर तकनीकी दिक्कतों के कारण इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन बदले गए, लेकिन इससे मतदान प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी एच. आर. श्रीनिवास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मतदान के दौरान कहीं भी बड़ी हिंसक घटना की सूचना नहीं मिली है। सुरक्षा बलों की तैनाती और निगरानी के कारण मतदान शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने लोकतंत्र में अपनी गहरी आस्था दिखाकर एक नया संदेश दिया है।
इस चरण में 2.18 करोड़ से अधिक मतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का मौका मिला, जिनमें लगभग 1.10 करोड़ पुरुष, 1.08 करोड़ महिलाएं और 1,230 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल थे। इन मतदाताओं ने 1,450 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला ईवीएम में बंद कर दिया है।
चुनाव आयोग ने बताया कि दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे। व्हीलचेयर, रैंप और हेल्प डेस्क जैसी सुविधाओं ने मतदान प्रक्रिया को आसान बनाया। इसके अलावा, पहली बार कई बूथों पर मॉडल पोलिंग स्टेशन बनाए गए थे, जिनमें महिला कर्मियों द्वारा पूरी मतदान प्रक्रिया संचालित की गई।
पहले चरण की वोटिंग पूरी होने के साथ अब राजनीतिक दलों की निगाहें दूसरे चरण के चुनाव पर हैं, जो 11 नवंबर को होने हैं। प्रमुख राजनीतिक दल , एनडीए और महागठबंधन , दोनों इस परिणाम को अपने लिए निर्णायक मान रहे हैं। पहले चरण में मिली भारी मतदान प्रतिशत से चुनावी मुकाबला और भी रोमांचक हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अधिक मतदान प्रतिशत आमतौर पर बदलाव के संकेत के रूप में देखा जाता है। ऐसे में बिहार के पहले चरण के नतीजे यह तय करेंगे कि जनता ने किस पर भरोसा जताया , मौजूदा एनडीए सरकार पर या विपक्षी महागठबंधन पर।
चुनाव आयोग ने कहा है कि सभी चरणों के मतदान संपन्न होने के बाद 14 नवंबर को मतगणना होगी और उसी दिन स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी कि बिहार की सत्ता पर कौन काबिज होगा। फिलहाल पहले चरण का रिकॉर्ड मतदान बिहार की राजनीति में नई ऊर्जा का संकेत दे रहा है।












