बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग से ठीक पहले सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंचने के बाद अब थम गई है। 6 नवंबर को राज्य की 121 सीटों पर मतदान होना है, जिसके नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। प्रचार के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने एक-दूसरे पर जमकर निशाना साधा। सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर पूरे दिन चलता रहा।
इस बार के चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार और महागठबंधन के बीच सीधा मुकाबला है। एनडीए में बीजेपी, जेडीयू, हम और रालोसपा जैसे दल शामिल हैं, जबकि विपक्षी महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस और वामदल एकजुट होकर मैदान में हैं। दोनों पक्षों के नेता जनता के बीच अपने-अपने वादों और विकास के दावों को लेकर पहुंचे, लेकिन आखिरी दौर में पुलों के ध्वस्त होने का मुद्दा सियासी बहस का केंद्र बन गया।
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने प्रचार के अंतिम दिन नीतीश कुमार और बीजेपी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत के पुल और सड़कें या तो ध्वस्त हो चुके हैं या जर्जर स्थिति में हैं। तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा, सरकार कहती है कि पुल चूहे कुतर गए, लेकिन जनता जानती है कि असली चूहे कौन हैं। ये चूहे भ्रष्टाचार के हैं, जो बिहार का पैसा खा गए।
तेजस्वी ने यह भी कहा कि बिहार में विकास नहीं, विनाश हुआ है। उन्होंने जनता से अपील की कि इस बार बदलाव की बयार लाने का समय है। आरजेडी नेता ने अपने भाषणों में बार-बार रोजगार, शिक्षा और किसानों की समस्याओं को उठाया और कहा कि “15 साल में नीतीश कुमार ने सिर्फ दिखावा किया है, जबकि युवाओं को नौकरी और किसानों को मूल्य नहीं मिला।
तेजस्वी के आरोपों पर बीजेपी और जेडीयू ने तीखा पलटवार किया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भागलपुर की रैली में कहा, तेजस्वी यादव को भ्रष्टाचार पर बोलने से पहले अपने परिवार के शासन को याद करना चाहिए। उनके समय में बिहार में अपहरण उद्योग और जंगलराज चलता था। शाह ने कहा कि पुलों की मरम्मत और निर्माण कार्यों में जांच जारी है और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई भी हो रही है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कहा कि विपक्ष झूठ फैला रहा है। उन्होंने कहा, कुछ घटनाएं हुई हैं, लेकिन सरकार ने हर मामले में जांच के आदेश दिए हैं। हम विकास के काम में कभी समझौता नहीं करेंगे। नीतीश ने विपक्ष पर यह भी आरोप लगाया कि वे जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गया और मुजफ्फरपुर में जनसभाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बिहार ने विकास का जो सफर तय किया है, उसे रोकने नहीं दिया जाएगा। मोदी ने नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि “डबल इंजन की सरकार ने बिहार को अंधकार से बाहर निकाला है।” उन्होंने जनता से अपील की कि वे एनडीए को एक बार फिर मौका दें ताकि राज्य में विकास की रफ्तार और तेज हो सके।
वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सीवान और सासाराम में रैलियां कीं। उन्होंने कहा कि मोदी और नीतीश की जोड़ी ने बिहार को बेरोजगारी और महंगाई की आग में झोंक दिया है। राहुल ने कहा, मोदी जी हर जगह ‘मेड इन इंडिया’ की बात करते हैं, लेकिन बिहार में युवाओं को रोजगार नहीं देते। पुल टूटते हैं, सड़कें धंसती हैं, और फिर कहते हैं चूहे जिम्मेदार हैं।
पहले चरण में 121 सीटों पर वोटिंग होगी, जिनमें सबसे ज्यादा सीटें सीमांचल, मगध और दक्षिण बिहार के इलाकों में हैं। इस चरण में कई दिग्गज नेताओं की किस्मत दांव पर लगी है, जिनमें 18 मंत्रियों के साथ-साथ आरजेडी, बीजेपी और कांग्रेस के कई पुराने चेहरे शामिल हैं। चुनाव आयोग ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं, और कुल 2.5 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
बिहार चुनाव का यह पहला चरण सिर्फ विकास के मुद्दे पर नहीं, बल्कि विश्वास बनाम बदलाव की लड़ाई बन गया है। पुलों का टूटना, चूहों पर जिम्मेदारी डालना और भ्रष्टाचार के आरोप जैसे मुद्दों ने माहौल को और गरमा दिया है। अब 6 नवंबर को जनता तय करेगी कि बिहार की सियासत में कौन से पुल मजबूत होंगे , सत्ता के या विपक्ष के।












