बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राज्य की राजनीति में हलचल तेज होती जा रही है। विपक्षी महागठबंधन में शामिल दलों के बीच सीटों को लेकर अब तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी है। सूत्रों के अनुसार, राजद (RJD), कांग्रेस और वाम दलों के बीच कई सीटों पर मतभेद गहराते जा रहे हैं, जिसके चलते गठबंधन में अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि महागठबंधन में सीटों को लेकर असहमति इतनी गहरी है कि कई क्षेत्रों में सहयोगी दल अब एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि सीट बंटवारे पर राजद और कांग्रेस के बीच विवाद सबसे बड़ा अड़चन बनकर उभरा है। कांग्रेस चाहती है कि उसे कम से कम 70 सीटें मिलें, जबकि राजद उसे 50 से अधिक देने को तैयार नहीं है। वहीं, वाम दलों का भी कहना है कि पिछली बार उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया था, इसलिए इस बार उन्हें अधिक सीटों पर मौका मिलना चाहिए।
महागठबंधन के भीतर की यह स्थिति भाजपा-जदयू गठबंधन के लिए राहत की खबर मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, अगर विपक्षी दल आपस में एकजुट नहीं हुए, तो एनडीए को लाभ मिल सकता है। बीते कुछ दिनों में जदयू नेता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी विपक्षी मतभेदों पर निशाना साधते हुए कहा था कि जो खुद में एक नहीं, वह जनता को कैसे एक करेगा।
महागठबंधन के प्रमुख दल राजद ने हालांकि मतभेदों को सामान्य प्रक्रिया बताया है। पार्टी प्रवक्ता का कहना है कि सभी मुद्दों पर बातचीत जारी है और जल्द ही एक साझा रणनीति सामने आएगी। लेकिन अंदरखाने की खबरों के अनुसार, कई स्थानीय नेता अब टिकट के बंटवारे को लेकर खुले तौर पर असंतोष जता रहे हैं।
बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने हैं। ऐसे में अगर महागठबंधन ने समय रहते मतभेद नहीं सुलझाए, तो विपक्षी एकता की जो तस्वीर विपक्षी मंचों पर दिखाई जाती रही है, वह जमीनी स्तर पर बिखरती नजर आ सकती है। फिलहाल, गठबंधन के नेताओं की कोशिश यही है कि किसी तरह आपसी सहमति बनाकर चुनावी मैदान में एकजुट होकर उतरा जाए लेकिन जमीन पर हालात कुछ और ही कहानी कह रहे हैं।












