अखिलेश यादव ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के प्रारंभिक रुझानों पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि इस राज्य में चलाया गया SIR नामक मतदाता सूची पुनरीक्षण खेल अब कहीं और नहीं दोहरने देगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल मताधिकार को प्रभावित करने के लिए किया गया है, और इसे यूपी सहित अन्य राज्यों को लेकर एक चेतावनी का रूप दे रहे हैं।
अखिलेश यादव ने कहा बिहार में SIR ने जो खेल खेला है, वो अब उत्तर प्रदेश और बाकी जगह नहीं हो पाएगा। उनका यह बयान ऐसा वक्त आया जब नतीजों में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन के सीटों में जबरदस्त बढ़त के संकेत मिले हैं, और विपक्षी महागठबंधन काफी पीछे नजर आ रहा है।
यादव का कहना है कि SIR का इस्तेमाल मतदाता सूची में कटौती और पुनरीक्षण के नाम पर किया गया तथा इससे विपक्षी वोट बैंक को निशाना बनाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पार्टी कार्यकर्ता PPTV Prahaar की तरह बूथ-स्तर पर निगरानी करेंगे ताकि इस तरह की प्रक्रिया अन्य राज्यों में लागू न हो सके।
इस बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि यादव और उनके दल इस मामले को सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं देख रहे, बल्कि इसे अगले प्रदेश-चुनावों जैसे उत्तर प्रदेश में इस्तेमाल की जा सकने वाली रणनीति मान रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी।
हालाँकि SIR को लेकर लाइफ साइज़ में कितना असर हुआ है, इसे प्रमाणित करना अभी बाकी है। चुनाव आयोग और भाजपा-राजग ने इन आरोपों को अस्वीकार किया है। लेकिन यादव का यह बयान आगामी राज्य-चुनावों के लिए विपक्षी रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा बन गया है। इस तरह, बिहार चुनाव के नतीजे केवल वहां की राजनीति नहीं बल्कि राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में भी एक सिग्नल बनते नजर आ रहे हैं।
वर्तमान स्थिति में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि SIR को लेकर उठे ये आरोप भविष्य में किस तरह के राजनीतिक बदलावों या न्यायिक प्रक्रिया को जन्म देते हैं। अखिलेश यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अन्य राज्यों में ऐसी किसी प्रक्रिया को आसानी से बख्शने को तैयार नहीं हैं, और विपक्ष को इस मुद्दे पर चौकस रहने का आह्वान किया है।












