बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा अध्याय जुड़ गया है। मंगलवार को जदयू नेता नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। पटना के राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही भाजपा के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण किया। इस पल को सियासी स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि प्रदेश में गठबंधन के नए समीकरणों के बाद यह मंत्रिमंडल गठन का पहला चरण है।
शपथ ग्रहण समारोह बेहद व्यवस्थित और गरिमामय माहौल में आयोजित किया गया। मंच पर पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शपथ ली, जिसके तुरंत बाद दोनों डिप्टी सीएम ने अपना पदभार संभालने के लिए शपथ ली। समारोह में कई दिग्गज नेता, वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद थे। नई सरकार को विकास, रोजगार और सुशासन के एजेंडे पर आगे बढ़ने की चुनौती होगी, जिस पर गठबंधन के दोनों प्रमुख दलों—जदयू और भाजपा—ने एक स्वर में काम करने का भरोसा जताया।
मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों की शपथ के बाद राज्यपाल ने मंत्रिमंडल के पहले चरण में कुल पाँच मंत्रियों को शपथ दिलाई। इनमें जदयू और भाजपा दोनों दलों के नेताओं को शामिल किया गया है, ताकि गठबंधन की शक्ति-संतुलन व्यवस्था स्पष्ट हो सके। पहले चरण में विजय चौधरी, विजेंद्र प्रसाद यादव, श्रवण कुमार, मंगल पांडेय और दिलीप जायसवाल ने मंत्री पद की शपथ ली।
विजय चौधरी, जो लंबे समय से नीतीश के भरोसेमंद नेताओं में शामिल रहे हैं, प्रशासनिक क्षमता और संगठन कौशल के लिए पहचाने जाते हैं। विजेंद्र प्रसाद यादव भी अनुभवी नेता हैं और कई बार महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। श्रवण कुमार, जो मुख्यमंत्री के बेहद करीब माने जाते हैं, ग्रामीण विकास और जनकल्याण योजनाओं में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। भाजपा कोटे से मंगल पांडेय और दिलीप जायसवाल ने शपथ ली है। मंगल पांडेय पूर्व में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं और संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। वहीं दिलीप जायसवाल की छवि एक सरल और जमीनी नेता की रही है।
मंत्रिमंडल के पहले चरण में पाँच मंत्रियों को शामिल करने के बाद अगले चरण में और नेताओं को स्थान मिलने की संभावना है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और अनुभवी तथा नए चेहरों के मिश्रण पर खास ध्यान दिया जाएगा। इस समय सरकार पर सबसे बड़ा दबाव प्रशासनिक मजबूती, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में तेज फैसले लेने का होगा।
शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य में विकास की गति को और तेज किया जाएगा और जनता के भरोसे पर खरा उतरना उनकी पहली प्राथमिकता है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा ने भी सरकार को स्थिर, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने का संकल्प व्यक्त किया। बिहार की राजनीति के इस नए अध्याय से जनता बड़ी उम्मीदें लगाए बैठी है, और आने वाले दिनों में सरकार किस दिशा में काम करेगी, इस पर सबकी नजर टिकी रहेगी।












