इस चरण में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी महागठबंधन (राजद, कांग्रेस और वाम दल) के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों गठबंधनों ने मतदाताओं को लुभाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। अब देखते हैं कि इस चरण में दोनों गठबंधनों की ताकत, कमजोरी, अवसर और खतरे क्या हैं।
एनडीए की सबसे बड़ी ताकत उसका संगठित ढांचा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता है। भाजपा और जदयू के पास बूथ स्तर तक मजबूत संगठन है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं — जैसे गरीब कल्याण योजना, मुफ्त राशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और सड़कों के विकास — का प्रचार भी एनडीए ने जोर-शोर से किया। इसके अलावा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सुशासन और कानून व्यवस्था को भी उपलब्धि के रूप में पेश किया गया।
एनडीए के सामने सबसे बड़ी चुनौती नीतीश कुमार की एंटी-इनकम्बेंसी (विरोधी लहर) है। लंबे समय से सत्ता में रहने के कारण जनता के एक हिस्से में नाराजगी दिखाई दे रही है। जदयू के अंदरूनी मतभेद और भाजपा के साथ तालमेल को लेकर भी सवाल उठे हैं। कई सीटों पर स्थानीय स्तर पर बगावत का असर पड़ सकता है।
महागठबंधन की सबसे बड़ी ताकत तेजस्वी यादव का युवा नेतृत्व और रोजगार का मुद्दा है। तेजस्वी ने पूरे प्रचार में बेरोजगारी, महंगाई और शिक्षा को केंद्र में रखा, जिससे युवाओं में अच्छा असर पड़ा। राजद की पारंपरिक वोटबैंक — यादव और मुस्लिम समुदाय — के साथ-साथ कांग्रेस और वामदलों के साथ आने से गठबंधन का सामाजिक समीकरण मजबूत हुआ है।
महागठबंधन के सामने सबसे बड़ी कमजोरी उसकी एकजुटता पर सवाल हैं। कई सीटों पर टिकट बंटवारे को लेकर असंतोष देखने को मिला। कांग्रेस और राजद के बीच तालमेल पूरी तरह सहज नहीं रहा। साथ ही, तेजस्वी के अनुभवहीन होने और राजद के “जंगलराज” के पुराने आरोपों को एनडीए ने चुनावी मुद्दा बना दिया।
एनडीए के लिए अवसर यह है कि यदि मतदान में शहरी और महिला वोटर बड़ी संख्या में बाहर आते हैं, तो उसका लाभ उन्हें मिल सकता है। वहीं, महागठबंधन के लिए अवसर ग्रामीण और युवा मतदाताओं के बीच बढ़ते असंतोष को वोट में तब्दील करने का है।
दोनों गठबंधनों के लिए सबसे बड़ा खतरा क्षेत्रीय दलों और बागी उम्मीदवारों की मौजूदगी है, जो वोटों में सेंध लगा सकते हैं।
पहले चरण का चुनाव यह तय करेगा कि बिहार की हवा किस ओर बहेगी — विकास के नाम पर एनडीए की ओर या बदलाव की चाह में महागठबंधन के पाले में।












