बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, प्रदेश की सियासत गर्माती जा रही है। सभी राजनीतिक दल मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। आज बिहार की राजनीतिक हलचल चरम पर है, क्योंकि एक ही दिन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई दिग्गज नेता राज्य के अलग-अलग इलाकों में चुनावी रैलियां कर रहे हैं।
भाजपा की ओर से आज कई बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर में गृह मंत्री अमित शाह की रैलियों में बड़ी भीड़ उमड़ी। शाह ने अपने भाषण में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिहार का विकास नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा और राज्य को “बिहार से बाहर रोजगार” की विवशता से मुक्त किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस और आरजेडी ने वर्षों तक बिहार को भ्रष्टाचार, अपराध और पिछड़ेपन में धकेला।
वहीं, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीतामढ़ी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार और भाजपा का लक्ष्य सिर्फ वोट नहीं, बल्कि “सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत” बनाना है। उन्होंने घुसपैठियों और अवैध संपत्तियों के मुद्दे पर तीखा रुख अपनाते हुए कहा, “बिहार में भाजपा की सरकार बनी तो घुसपैठियों की संपत्तियां जब्त की जाएंगी और उन पर कब्जा कर गरीबों के लिए आवास बनवाए जाएंगे। देश के संसाधनों पर सबसे पहला हक भारत के गरीबों और युवाओं का है, न कि अवैध रूप से देश में घुसे लोगों का।”
योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने आतंकवाद, घुसपैठ और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण किया है, और बिहार को भी इसी राह पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने जनता से भाजपा को पूर्ण बहुमत देने की अपील की।
दूसरी ओर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पटना में आयोजित सभा में केंद्र सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल धर्म और जाति की राजनीति कर रही है, जबकि कांग्रेस जनता के मुद्दों पर बात करती है। उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई और किसान समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बताते हुए कहा कि कांग्रेस गठबंधन गरीबों और युवाओं के लिए काम करेगी।
इस बीच, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दरभंगा में विपक्षी गठबंधन की एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि जनता अब बदलाव चाहती है और बिहार में नई राजनीति की शुरुआत होगी।
कुल मिलाकर, बिहार में चुनावी माहौल बेहद गरम है। नेताओं की रैलियों से सियासी तापमान बढ़ गया है और जनता के बीच विकास, रोजगार, और सुरक्षा जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।












