मुसद्दीलाल की बीमारी और अचानक बढ़ी अहमियत
मुसद्दीलाल के बीमार पड़ते ही उनकी जिंदगी में एक अजीबोगरीब बदलाव आया। जो पत्नी हमेशा ताने देती थी और बिना वजह नाराज़ रहती थी, वह अब उनकी सेवा में जुट गई। सुबह बिना माँगे चाय, उसके बाद हेल्दी स्प्राउट्स का नाश्ता, और फिर नहाने में नरम कंधे का सहारा—सब कुछ मिलने लगा। रोटी के नरम फुल्के और परवल की सब्जी का रसा उन्हें प्यार से खिलाया जाने लगा।
दोस्तों और रिश्तेदारों के प्यार भरे संदेश आने लगे, ऑफिस का सख़्त बॉस भी “गेट वेल सून” के साथ फूलों का गुलदस्ता भेज दिया। इतनी खातिरदारी देखकर मुसद्दीलाल ने मन ही मन अपनी बीमारी को लंबा खींचने का फैसला कर लिया।
बीमारी को बनाए रखने के “गुप्त नुस्खे”
मुसद्दीलाल ने बीमारी के फायदों पर गहराई से सोचा। उन्हें लगा कि अगर सभी स्वस्थ रहने लगें, तो डॉक्टरों, दवा कंपनियों और “बीमारी सलाहकारों” का क्या होगा? इसलिए उन्होंने कुछ ऐसे तरीके ढूँढ़ निकाले, जिनसे कोई न कोई बीमारी हमेशा बनी रहे और आपको “वीआईपी अटेंशन” मिलता रहे।
- कसरत को कहें अलविदा!
शरीर को जंग लगाने का सबसे आसान तरीका है—बिल्कुल न हिलें! खाओ, पियो, और आराम से पड़े रहो। आड़े-टेढ़े बैठकर मोबाइल या अखबार में खोए रहिए। मांसपेशियाँ ढीली पड़ जाएँगी, जोड़ों में दर्द होगा, और मोटापा आपका स्थायी साथी बन जाएगा। यह “एंटी-एक्सरसाइज” थेरेपी हृदय रोग और डायबिटीज़ की गारंटी है!
- ताजी हवा और धूप से बचें
सुबह-शाम टहलना? यह तो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है! विटामिन डी और ताजी हवा से दूर रहिए। पर्दे खींचकर, एसी चलाकर अंधेरे कमरे में दुबके रहिए। ऑस्टियोपोरोसिस और डिप्रेशन आपका स्वागत करने को तैयार हैं!
- पाचन तंत्र को लगाएँ ओवरटाइम
व्रत रखने से पेट को आराम मिलता है? यह भूल जाइए! जब भी मन करे, तला-भुना, मसालेदार और मीठा खाइए। पेट को हमेशा व्यस्त रखिए। एसिडिटी, गैस और लिवर की समस्याएँ आपकी सेवा में हाजिर रहेंगी।
- अकेले और जल्दी-जल्दी खाएँ
परिवार के साथ बैठकर खाने से प्यार बढ़ता है? क्या फायदा? अकेले फोन चलाते हुए खाइए और जल्दी-जल्दी निबटाइए। पत्नी के बनाए खाने में कमियाँ निकालिए—इससे मानसिक तनाव भी मुफ़्त में मिलेगा!
- हँसने से बचें, गंभीर बने रहें
हँसने से एंडोर्फिन रिलीज़ होता है और तनाव कम होता है? यह तो स्वास्थ्य अपराध है! उदास और चिड़चिड़ा चेहरा बनाए रखिए। डिप्रेशन और सोशल आइसोलेशन आपके इस समर्पण को सलाम करेंगे।
- नींद की अनदेखी करें
देर रात तक जागिए, सोशल मीडिया स्क्रॉल करिए और टेंशन लीजिए। दिन में झपकियाँ लेकर रात की नींद उड़ाइए। अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और कमज़ोर इम्युनिटी—यह बीमारी का ट्रिपल बेनिफिट है!
- मन की बात दबाएँ, गिले-शिकवे पालें
अपनी भावनाएँ किसी से साझा न करें। अकेलेपन और मनोवैज्ञानिक उलझनों को निमंत्रण दीजिए—वे खुशी-खुशी आपके जीवन का हिस्सा बन जाएँगी।
- हमेशा शिकायत करें और तुलना करें
खुश रहने से जीवन आसान होता है, इसलिए हमेशा दूसरों से तुलना करके दुखी होइए। छोटी-छोटी बातों पर भड़किए और अनावश्यक बहसों को जन्म दीजिए। यह आपके सिरदर्द और ब्लड प्रेशर को नया रिकॉर्ड तोड़ने में मदद करेगा!
- नकारात्मक लोगों को अपने जीवन में बनाए रखें
कहते हैं एक अच्छा दोस्त दवाई की दुकान के बराबर होता है? तो फिर एक ऐसा साथी रखिए, जो आपको गलत सलाह दे, तनाव दे, और आपकी हर गलत आदत को बढ़ावा दे। वह आपके लिए “बीमारियों का सुपरस्पेशलिटी अस्पताल” साबित होगा!
बीमारी का VIP दर्जा ही क्यों?
थोड़ी सी लापरवाही—जैसे खुलकर हँस लेना या भोजन के बाद टहल लेना—आपके सालों के अस्वास्थ्य संचय को बर्बाद कर सकती है। इसलिए सतर्क रहिए, निराश रहिए, और बीमारी का भरपूर आनंद लीजिए। आखिरकार, बीमार रहकर ही तो आपको वह “वीआईपी अटेंशन” मिलता है, जिसका मजा ही कुछ और है!












