नई दिल्ली, 16 फरवरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से विधायक हरिश खुराना ने आम
आदमी पार्टी (आप) के शिक्षा संबंधित लगाए जा रहे आरोपो की निंदा की। उन्होंने कहा कि दिल्ली
की राजनीति में राहुल गांधी के मार्ग पर चल रहें है आप दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज।
हरीश खुराना ने सोमवार को दिल्ली सचिवालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए शिक्षा संबंधित
विषय पर आप के लगाए आरोप की आलोचना करते हुए कहा कि जब से आम आदमी पार्टी की
सरकार दिल्ली से गई है, तब से उनके नेताओं को दिल्ली की जनता का जनादेश स्वीकार नहीं हो पा
रहा है। उन्होंने कहा कि जब से दिल्ली में भाजपा की सरकार आई है आप प्रतिदिन कोई न कोई
नया भ्रम फैला रही है।
सौरभ भारद्वाज द्वारा एपीजे स्कूल, साकेत के मामले को लेकर उठाए गए विवाद पर हरीश खुराना
ने कहा कि यह मामला वर्ष 2020 से लंबित है। उस समय दिल्ली में किसकी सरकार थी, यह सब
जानते हैं। यदि यह मुद्दा गंभीर था, तो पांच वर्षों तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के समय भी ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई थी और उस समय हस्तक्षेप
कर बच्चों को राहत दिलाई गई थी। अब सरकार ने इस विषय पर स्थायी समाधान देने के लिए
कानून बनाया है।
हरीश खुराना ने बताया कि दिल्ली सरकार के लाए गए नए कानून में किसी भी छात्र का रोल नंबर
रोका नहीं जा सकता। अधिनियम की धारा 13 यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी विद्यालय
अभिभावकों से बिना पूर्व स्वीकृति अतिरिक्त या अनधिकृत शुल्क नहीं वसूल सकता और न ही दबाव
बनाकर फीस वसूली कर सकता है। यह व्यवस्था स्कूल-स्तरीय फीस रेगुलेशन कमेटियों और अपील
प्रक्रिया के माध्यम से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करती है।
उन्होंने कहा कि जब इस विधेयक का उद्देश्य अभिभावकों को न्याय दिलाना है। फीस वृद्धि पर
नियंत्रण, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है तो फिर इसका विरोध क्यों किया जा रहा है?
उन्होंने कहा कि दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने निर्देश दिए हैं कि दिल्ली में किसी भी बच्चे का
भविष्य बाधित नहीं होने दिया जाएगा। सभी छात्रों को उनका रोल नंबर मिलेगा और उनके अधिकारों
की रक्षा की जाएगी।
हरीश खुराना ने सवालिया लहजे में प्रश्न उठाते हए कहा कि “जस्टिस फॉर ऑल” नामक एक
एनजीओ द्वारा इस कानून का विरोध किया जा रहा तो इस संगठन और आम आदमी पार्टी के कुछ
नेताओं के बीच क्या संबंध हैं? दिल्ली की जनता जानना चाहती है कि आखिर अभिभावकों के हित में
लाए गए कानून का विरोध क्यों किया जा रहा है।
उन्होंने आप पर तंज कसते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में यदि फीस नियंत्रण और पारदर्शिता के
लिए मजबूत कानून लाया जाता तो आज यह स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। अब जब एक सशक्त
और पारदर्शी व्यवस्था लागू की गई है, तो उसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया जा रहा है।
दिल्ली सरकार जल्द तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करेगी। झूठ और भ्रम की राजनीति अब अधिक
समय तक नहीं चलेगी।












