भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी मोहम्मद कैफ ने हाल ही में टीम इंडिया के टेस्ट बल्लेबाजों की खराब फॉर्म और लगातार अस्थिर प्रदर्शन को लेकर चयन प्रक्रिया पर कड़ी नाराजगी जताई है। कैफ का मानना है कि मुख्य कोच गौतम गंभीर और टीम प्रबंधन के मार्गदर्शन में चयन को लेकर जो अनिश्चितता बनी हुई है, उसका सीधा असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर दिख रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान माहौल में युवा बल्लेबाजों को यह भरोसा नहीं है कि एक–दो मैच में अच्छा प्रदर्शन न होने पर भी उन्हें अवसर मिलता रहेगा।
कैफ ने विशेष रूप से दो युवा खिलाड़ियों साई सुदर्शन और सरफराज खान का उदाहरण देते हुए कहा कि घरेलू क्रिकेट और इंडिया-ए स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद इन खिलाड़ियों को टेस्ट टीम में लगातार मौके नहीं मिले। यह चयन प्रक्रिया की असंगति को दर्शाता है। कैफ ने कहा कि साई सुदर्शन ने रणजी और आईपीएल दोनों में शानदार बल्लेबाजी की, लेकिन उन्हें टेस्ट टीम में जगह देने के बाद तुरंत बाहर बैठा दिया गया। इसी प्रकार, सरफराज खान को लंबे समय तक इंतज़ार करवाया गया, और मौका मिलने पर रन बनाने के बावजूद उन्हें स्थायी स्थान नहीं दिया गया।
पूर्व क्रिकेटर के अनुसार, चयन की इस अनिश्चितता ने खिलाड़ियों के मन में डर का माहौल पैदा कर दिया है। कैफ ने कहा, खिलाड़ी आज दबाव में खेल रहे हैं क्योंकि उन्हें भरोसा नहीं है कि टीम मैनेजमेंट उनका साथ देगा। टेस्ट क्रिकेट में खिलाड़ी तभी निखरता है जब उसे यह विश्वास हो कि टीम उसके साथ खड़ी है, चाहे एक–दो मैच खराब ही क्यों न जाएं। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट हमेशा से प्रतिभाओं को निखारने के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन वर्तमान चयन पद्धति युवा खिलाड़ियों का आत्मविश्वास कमजोर कर रही है।
कैफ ने आगे कहा कि टेस्ट बल्लेबाजों के खराब प्रदर्शन का एक बड़ा कारण यह मानसिक दबाव भी है। भारत ने हाल के घरेलू टेस्ट मुकाबलों में अप्रत्याशित बल्लेबाजी प्रदर्शन दिखाया है, जहां अनुभवी और युवा दोनों स्तरों के खिलाड़ियों ने स्थिरता की कमी दिखाई। कैफ का मानना है कि लगातार बदलाव और खिलाड़ियों पर बनाया गया असुरक्षा का माहौल टीम के अंदर लंबी अवधि में नुकसान पहुंचा सकता है।
उन्होंने टीम प्रबंधन और कोचिंग स्टाफ से अपील की कि वे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाएं और खिलाड़ियों को स्पष्ट रूप से बताएँ कि उनके रोल क्या हैं और उन्हें कितना समर्थन मिलेगा। उनके अनुसार, बीसीसीआई और चयनकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों को पर्याप्त मौके मिलें और उनके एक दो असफल मैचों के आधार पर कठोर निर्णय न लिए जाएं।
कैफ की यह टिप्पणी भारतीय क्रिकेट में चल रही उस बहस को और गहरा कर देती है जिसमें सवाल उठ रहे हैं कि क्या चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन का दबाव भारतीय टेस्ट क्रिकेट की स्थिरता को प्रभावित कर रहा है।












