एक ऐतिहासिक उपलब्धि: 41 साल बाद अंतरिक्ष में भारत का कदम
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने 2025 में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 41 वर्षों के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बनने का गौरव प्राप्त किया। वे न केवल अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहुँचने वाले पहले इसरो-प्रशिक्षित अंतरिक्ष यात्री बने, बल्कि 1984 के बाद किसी भारतीय की पहली अंतरिक्ष यात्रा को भी पूरा किया।
शुभांशु शुक्ला: एक प्रेरणादायक जीवन यात्रा
शुभांशु शुक्ला का जन्म 10 अक्टूबर 1985 को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने सिटी मॉन्टेसरी स्कूल से शिक्षा प्राप्त की और 2006 में भारतीय वायुसेना में कमीशन प्राप्त किया। एक अनुभवी फाइटर पायलट के रूप में, उन्होंने 2000 से अधिक उड़ान घंटों का अनुभव हासिल किया, जिसने उन्हें इस महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन के लिए तैयार किया।
स्पेसएक्स के साथ ऐतिहासिक यात्रा
25 जून 2025 को, ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट द्वारा ‘ड्रैगनफ्लाई’ अंतरिक्ष यान से अपनी यात्रा शुरू की। 28 घंटे की यात्रा के बाद, 26 जून को वे सफलतापूर्वक अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से जुड़ गए। इसके साथ ही, वे अंतरिक्ष में जाने वाले विश्व के 634वें व्यक्ति बन गए।
अंतरिक्ष में भारत का वैज्ञानिक योगदान
अठारह दिनों के अपने मिशन के दौरान, शुभांशु शुक्ला ने 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें शामिल थे:
- मांसपेशियों की हानि और हड्डियों पर अंतरिक्ष का प्रभाव
- मानसिक स्वास्थ्य और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए मनोवैज्ञानिक अध्ययन
- माइक्रोएल्गी और नई सेंट्रीफ्यूगेशन तकनीक पर अनुसंधान
- अंतरिक्ष में फसल उगाने के प्रयोग
इनमें से कई प्रयोग पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित थे, जिन्हें भारतीय वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा विकसित किया गया था।
छात्रों और प्रधानमंत्री से संवाद
अपने मिशन के दौरान, शुक्ला ने अंतरिक्ष से तीन बार भारतीय छात्रों से संवाद किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत की। यह पल भारत के युवाओं के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत बना।
सफल वापसी और भविष्य की राह
14 जुलाई को शाम 4:45 बजे (IST), ‘ग्रेस’ यान ने ISS से अलग होकर पृथ्वी की ओर वापसी की यात्रा शुरू की। 15 जुलाई 2025 को दोपहर 3 बजे, कैलिफोर्निया के तट पर स्प्लैशडाउन के साथ शुक्ला सकुशल धरती पर लौट आए। वापसी के बाद, उन्हें और उनकी टीम को 7 दिनों के पुनर्वास कार्यक्रम से गुजरना पड़ा, ताकि वे पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के अनुकूल हो सकें।
भारत के अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए नई दिशा
शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के लिए एक नया अध्याय भी खोलती है। उनके इस मिशन से गगनयान जैसे भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों को नई दिशा मिलेगी।












