अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्ताकी ने हाल ही में भारत में अपनी यात्रा के दौरान कहा है कि वे देश के साथ संबंधों को बहुत उम्मीदों के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं। मुत्ताकी की ये टिप्पणी भारत-अफगानिस्तान के संबंधों को नए दौर में ले जाने की दिशा में एक संकेत माना जा रहा है।
मुत्ताकी ने कहा कि उनका दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं है, बल्कि वह भारत और अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की मंशा लेकर आए हैं। उन्होंने भारत को नज़दीकी मित्र बताया और दोनों देशों को विभिन्न क्षेत्रों जैसे व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य और शिक्षा में एक दूसरे के प्रति प्रतिबद्ध रहने की अपील की। मुर्त्ताकी के अनुसार, भारत-अफगानिस्तान के बीच हर स्तर पर संवाद और साझेदारी को बढ़ाना ज़रूरी है।
दोनो देशों की बातचीत में पहले ही महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं। भारत ने अपनी काबुल में स्थित तकनीकी मिशन को दूतावास के दर्जे में अपग्रेड करने की योजना घोषित की है। मुर्त्ताकी ने यह उम्मीद जताई कि जल्द ही दोनों देशों के राजनयिक मिशन नियमित रूप से काम करेंगे और एक-दूसरे के देशों में राजदूत भेजे जाएंगे।
भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार एवं संपर्क पर भी जोर दिया गया। मुत्ताकी ने उम्मीद जताई कि भारत की मौजूदा नीतियाँ और निवेश अफगानिस्तान में आर्थिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करेंगी। विशेष रूप से चाबहार पोर्ट, वाघा सीमा, और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर चर्चा हुई है।
मुत्ताकी ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान भारत की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वाधीनता का सम्मान करता है। साथ ही, उन्होंने उम्मीद जताई कि आतंकवाद-रोधी प्रयासों में दोनों देश मिलकर काम करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि अफगानिस्तान किसी भी देश के लिए हमला स्थल न बने।
हालाँकि, इस प्रयास के बीच कुछ विवाद और असहमति भी उभरी हैं। विशेष रूप से मुत्ताकी के पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को शामिल न किए जाने को लेकर आलोचना हुई। इस पर उन्होंने बाद में सफाई दी और कहा कि यह तकनीकी समस्या थी।
कुल मिलाकर, मुत्ताकी की टिप्पणी बहुत उम्मीद लेकर आए हैं इस बात का प्रतीक है कि अफगानिस्तान भारत से रिश्तों को एक नए मुकाम पर ले जाना चाहता है। यह समय दोनों देशों के लिए एक चुनौती और अवसर दोनों है रणनीतिक, आर्थिक और मानवीय रूप से।












