भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच सोमवार को हुई 22वें दौर की कोर कमांडर स्तर की वार्ता में सीमा पर शांति बहाल करने और विवादित क्षेत्रों में सैन्य गतिरोध को घटाने पर चर्चा हुई। बैठक चुशूल-मोल्डो सीमा बिंदु पर आयोजित की गई, जिसमें दोनों पक्षों ने स्पष्ट रूप से कहा कि संवाद ही आगे का रास्ता है।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल रंजन कपूर ने किया, जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व मेजर जनरल यांग लिन ने संभाला। बैठक में दोनों देशों के बीच चल रहे गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स और देपसांग क्षेत्र में लंबित विवादों पर भी विचार-विमर्श हुआ। भारतीय पक्ष ने दो टूक कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बहाल हुए बिना द्विपक्षीय संबंध सामान्य नहीं हो सकते।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। चीन ने भी सीमा पर तनाव घटाने और सैनिकों की संख्या कम करने पर विचार करने की बात कही है। हालांकि, अंतिम समझौते तक पहुंचने में अभी समय लग सकता है। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि वार्ता जारी रखी जाएगी और अगले दौर की बातचीत जल्द तय की जाएगी।
गौरतलब है कि 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद से भारत-चीन संबंधों में गहरी दरार आई थी। हालांकि कई दौर की वार्ताओं के बाद कुछ इलाकों से सेनाएँ पीछे हटी हैं, लेकिन अभी भी पूर्वी लद्दाख के कुछ हिस्सों में तनाव कायम है।
विश्लेषकों का मानना है कि ताज़ा बैठक से दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की प्रक्रिया को बल मिलेगा और सीमा पर स्थायी समाधान की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। भारत ने साफ किया है कि उसका लक्ष्य सीमाओं पर शांति, स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है — समझौता नहीं।












