भारत में देश का फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट अब बनने की ओर अग्रसर है DRDO के साथ मिलकर इसके प्रोटोटाइप डिजाइन और विकास के लिए 7 भारतीय कंपनियों ने बोलियां लगाई है और 2035 तक इसके भारतीय वायु सेवा में शामिल होने की संभावना है ।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के साथ मिलकर इस अत्याधुनिक फाइटर जेट के डिजाइन और विकास के लिए सात प्रमुख कंपनियों ने बोली लगाई है ।
इस प्रोजेक्ट की लागत अनुमानित 2 लाख करोड़ से अधिक होने की संभावना है और यह लगभग वर्ष 2035 तक भारतीय वायु सेवा में अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकता है ।
इस उपलब्धि के साथ भारत अमेरिका चीन और रूस जैसे देशों की श्रेणी में उपस्थित हो जाएगा जो विश्व में पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स का संचालन करते हैं ।
पांचवीं पीढ़ी के इस फाइटर जेट्स में 21वीं सदी की शुरुआत में विकसित उन्नत तकनीक का उपयोग करते हैं इसमें बेहतर युद्ध क्षेत्र सॉफ्टवेयर शामिल होते हैं जो पायलट को युद्ध क्षेत्र और दुश्मन की स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराते हैं यह जेट्स कमांड नियंत्रण और संचार क्षमताओं को सुनिश्चित करते हैं तथा इनमें गतिशीलता उन्नत सेंसरों के लिए जाने जाते हैं ।
स्थिति के अनुसार पाकिस्तान और चीन के साथ हाल के तनावों के बाद भारत ने हाल ही में फ्रांस से 26 राफेल एम फाइटर जेट खरीदने का सौदा किया था जो 2031 तक नौसेना में शामिल होने की संभावना है ।






