बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी CPI ने बड़ा राजनीतिक दांव चल दिया है। सीटों के आधिकारिक बंटवारे से पहले ही पार्टी ने अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। इस कदम से न केवल महागठबंधन के अंदर खलबली मच गई है, बल्कि अन्य सहयोगी दलों विशेषकर राजद और कांग्रेस — पर भी दबाव बढ़ गया है।
सूत्रों के अनुसार, CPI की पहली सूची में 12 प्रत्याशियों के नाम शामिल हैं। इनमें से कई सीटें ऐसी हैं जो 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद या कांग्रेस के कोटे में थीं। पार्टी ने दावा किया है कि उसने उन इलाकों में प्रत्याशी उतारे हैं, जहाँ उसका संगठनात्मक आधार मजबूत है और जनता के बीच उसकी पकड़ गहरी है। पार्टी के प्रदेश सचिव ने कहा कि CPI महागठबंधन की मजबूत घटक है और हम चाहते हैं कि सीट बंटवारा सम्मानजनक तरीके से हो। हमने केवल तैयारी के तहत अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं।
राजद खेमे में इस कदम को लेकर नाराज़गी देखी जा रही है। राजद के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि CPI को ऐसा कदम उठाने से पहले गठबंधन के साथ चर्चा करनी चाहिए थी। इससे गलत संदेश जाता है। वहीं, कांग्रेस ने इसे जल्दबाजी का फैसला बताया है और कहा है कि अभी सीट बंटवारे पर अंतिम बातचीत होनी बाकी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि CPI का यह फैसला दबाव बनाने की रणनीति है। पार्टी चाहती है कि उसे पिछली बार से अधिक सीटें मिलें, क्योंकि 2020 में वाम दलों ने महागठबंधन के तहत अच्छा प्रदर्शन किया था। CPI(ML), CPI और CPM ने मिलकर करीब दो दर्जन सीटें जीती थीं, जिससे वाम दलों का मनोबल बढ़ा है।
अब देखना यह होगा कि क्या महागठबंधन की अन्य पार्टियाँ CPI के इस खेला को स्वीकार करती हैं या फिर आने वाले दिनों में सीट बंटवारे की नई खींचतान शुरू होती है। कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति में चुनावी बिगुल बजने से पहले ही वाम दलों ने अपने तेवर साफ कर दिए हैं कि वे अब सहयोगी से ज्यादा निर्णायक भूमिका में दिखना चाहते हैं।












