आज 13 अक्टूबर , महान गायक किशोर कुमार पुण्यतिथि है , भारतीय सिनेमा और संगीत जगत में कुछ नाम ऐसे हैं जो सदियों तक अमर रहते हैं। उन्हीं में से एक हैं — किशोर कुमार, जिनका असली नाम आभास कुमार गांगुली था। वे न केवल एक अप्रतिम गायक थे, बल्कि एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी अभिनेता, संगीतकार, निर्देशक, लेखक और निर्माता भी थे। 13 अक्टूबर 1987 को वे इस दुनिया को अलविदा कह गए, पर उनकी आवाज़ आज भी हर संगीतप्रेमी के दिल में जिंदा है।
किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा में हुआ था। उन्होंने बिना किसी औपचारिक संगीत शिक्षा के अपनी आवाज़ से वह करिश्मा कर दिखाया, जो बड़े-बड़े प्रशिक्षित गायक नहीं कर पाए। शुरूआत में वे अभिनेता के रूप में फिल्मों में आए, लेकिन जल्द ही उनकी गायकी ने सबका ध्यान खींच लिया। फिल्म आराधना 1969 में रूप तेरा मस्ताना गीत से उनकी लोकप्रियता शिखर पर पहुंच गई। उसके बाद तो “मेरा जीना है क्या, पल पल दिल के पास, जिंदगी एक सफर है सुहाना और चला जाता हूं किसी की धुन में जैसे गीत अमर हो गए।
किशोर कुमार की आवाज़ में एक अनोखी जीवंतता थी। वे भावनाओं को इतनी सहजता से व्यक्त करते थे कि सुनने वाला खुद उस एहसास में खो जाता था। उनके गीतों में रोमांस, मस्ती, दर्द और जिंदगी का दर्शन सब कुछ झलकता था।
एक अभिनेता के रूप में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। चलती का नाम गाड़ी , पड़ोसन , और हाफ टिकट जैसी फिल्मों में उनकी हास्य प्रतिभा दर्शकों को आज भी गुदगुदाती है।
किशोर कुमार जी का जीवन उतार-चढ़ाव से भरा रहा, पर उन्होंने हर परिस्थिति में संगीत को जिया। वे सच्चे अर्थों में फन के फकीर थे, जिन्हें शोहरत या पैसा नहीं, बल्कि अपने काम से सच्चा प्रेम था।
आज उनकी पुण्यतिथि पर पूरा देश उन्हें नमन करता है। किशोर दा की आवाज़ केवल सुरों का संगम नहीं, बल्कि भावनाओं की अभिव्यक्ति है , जो पीढ़ी दर पीढ़ी भारतीय संगीत को प्रेरित करती रहेगी।












