उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन का आयोजन किया गया , यह आयोजन कांशीराम की पुण्यतिथि पर किया गया , परंतु इसे केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं अपित आगामी 2027 की विधानसभा चुनाव की तैयारी का प्रथम बड़ा कदम माना जा रहा है ,इस रैली में पार्टी ने दावा किया कि लाखों की भीड़ जुटी और मायावती ने मंच से विपक्षी दलों पर तीखे आक्रमण किए ।
रैली कांशीराम स्मारक स्थल पर आयोजित की गई थी , रैली स्थल के चारों ओर नीले झंडों और नारों के पोस्ट से सजा दिए गए थे , पार्टी के प्रतीक और नारे हर स्थान पर दिखाई दे रहे थे , पार्टी ने कहा कि लगभग 5 लाख कार्यकर्ता इस आयोजन में सम्मिलित हुए ,सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे , लगभग 2000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए और ट्रैफिक डायवर्जन व मार्ग बंदी की व्यवस्था भी की गई थी ।
रैली स्थल तक आने वाले मार्गों पर वहां आवागमन बंद किया गया , बेरीकेटिंग लगाई गई और संपर्क मार्गों को भी नियंत्रित किया गया , कुछ क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की क्षमता भी सीमित की गई थी , रमाबाई अंबेडकर मैदान में कार्यकर्ताओं के ठहरने की उचित व्यवस्था भी की गई थी ।
बसपा संगठन कार्यकर्ताओं को अलग-अलग भूमिका व जिम्मेदारियां सौंपी गई थी , प्रवासी कार्यकर्ता , गाड़ियों का समायोजन , पथ प्रदर्शन ,मंच प्रबंधन ,स्वागत , भेंट , सुरक्षा आदि की संगठन के कार्यकर्ताओं ने व्यवस्था की ।
रैली में सम्मिलित भीड़ को देखकर यह स्पष्ट था कि पार्टी ने व्यापक स्तर पर अपने समर्थन जुटाएं हैं अन्य प्रदेशों में भी वाहनों द्वारा समर्थन ले गए थे , बसपा की ओर से दावा किया गया कि यह रैली पार्टी की एक जूता और शक्ति का प्रदर्शन है ।
कार्यकर्ता और समर्थक झंडा गाड़ियां पोस्टर एवं तारों के साथ उपस्थित थे मंच पर पहुंचने की संभावना करने वाले मार्गों पर समर्थक कतारों में खड़े दिखे । मायावती ने रैली में उपस्थित लोगों को कहा कि जनसमूह ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है और उन्होंने उपस्थितों का धन्यवाद किया।
जनता को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा उन्होंने समाजवादी पार्टी सपा और कांग्रेस पर दोगले चरित्र का आरोप लगाया उन्होंने कहा कि यह दल काशीराम के प्रति सिर्फ राजनीतिक नजरिए से निष्ठा दिखाते हैं लेकिन असल में उनकी नीतियां हितों के अनुकूल नहीं है ।
सपा शासन काल में स्मारकों की देखभाल नहीं हुई और वहां पर किए गए नामकरण व परियोजनाएं बाद में बदली गई । उन्होंने वर्तमान भाजपा सरकार को आंशिक समर्थन देते हुए कहा कि पूर्व सरकारों की तुलना में वर्तमान सरकार ने स्मारकों की मरम्मत पर खर्च किया और आय को सही दिशा में इस्तेमाल किया ।
भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि 2027 में बसपा कोई गठबंधन नहीं करेगी उन्होंने दलील दी कि जब भी पार्टी ने गठबंधन किया उसे वोटो का नुकसान हुआ है इसलिए इस बार अकेले चुनाव लड़ा जाएगा , उन्होंने यह भी कहा कि बसपा समर्थक दलित व पिछड़ा वर्ग को सशक्त करना चाहती है और आरक्षण की लड़ाई अभी पूरी नहीं हुई है ।
मायावती ने पहलगाम हमले का जिक्र किया और कहा कि यदि पहले सुरक्षा उपाय बेहतर होते तो नुकसान कम हो सकता था इस संदर्भ में उन्होंने केंद्र की विदेश नीति और आतंकवाद विरोधी रूप पर भी टिप्पणी की ,
रैली में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ राजनीतिक आयोजन नहीं बल्कि पार्टी की मजबूती का प्रमाण है उन्होंने समर्थकों से आग्रह किया कि वह इस अभियान को आगे ले जाएं और 2027 को लक्ष्य बनाएं ।
मायावती की शक्ति प्रदर्शन रैली सिर्फ एक राजनीतिक सभा नहीं बल्कि एक रणनीतिक पहल थी इससे बसपा ने यह संकेत देने की कोशिश की उसने अपनी शक्ति अब भी बरकरार रखी है और वह 2027 के चुनाव को लेकर तैयार है विपक्ष पर तीखे हमले गठबंधन से दूर रहने का ऐलान और पार्टी के लिए नए नेतृत्व की चर्चा यह सभी संकेत है कि बसपा अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है ।
यह स्पष्ट है कि यूपी की राजनीति में इस रैली का असर दिखाना मुश्किल है समय आने वाला है , यह देखने का की मायावती इस ऊर्जा को धरातल पर कितना रूप दे पाती हैं , यानी विधानसभा चुनाव में उनका वोट बैंक कितना फैलेगा , कितने वोटो को वह अपने पक्ष में जीत पाएंगे और विपक्षी दलों के लिए यह आयोजन किस तरह से चुनौती बनेगा ।












