सुप्रीम कोर्ट ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के आवास से जुड़ी व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब नए मुख्य न्यायाधीश को पद संभालने के बाद आधिकारिक निवास मिलने के लिए छह महीने तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। व्यवस्था में इस बदलाव का उद्देश्य शीर्ष न्यायिक पद की गरिमा के अनुरूप सुविधा उपलब्ध कराना और प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाना है। अब से CJI के लिए दो आधिकारिक सरकारी आवास निर्धारित किए गए हैं—5 कृष्ण मेनन मार्ग और 19 अकबर रोड। इन दोनों में से किसी एक को तत्काल आवंटित कर नए CJI के सुचारू रूप से पदग्र्रहण और निवास से जुड़े तमाम प्रोटोकॉल पूरे किए जा सकेंगे।
गौरतलब है कि अब तक कई बार ऐसा देखा गया था कि नए मुख्य न्यायाधीश को पद ग्रहण करने के बाद उपयुक्त सरकारी आवास मिलने में महीनों लग जाते थे। इस कारण उन्हें अस्थायी रूप से गेस्ट हाउस या अन्य वैकल्पिक आवास में रहना पड़ता था, जो न केवल असुविधाजनक था, बल्कि उच्च संवैधानिक पद के मान-सम्मान के अनुरूप भी नहीं माना जाता था। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर नई व्यवस्था लागू की है।
इस बदलाव के बाद आने वाले मुख्य न्यायाधीशों के लिए निवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया काफी सरल हो गई है। अब दो सरकारी बंगले हमेशा तैयार स्थिति में रखे जाएंगे, ताकि CJI के पदभार ग्रहण करते ही उन्हें एक सुरक्षित, व्यवस्थित और पूर्णतः तैयार आवास मिल सके। इन बंगलों में आवश्यक सुरक्षा उपाय, स्टाफ क्वार्टर, कार्यालय सुविधा और अन्य उच्चस्तरीय व्यवस्थाएँ पहले से सुनिश्चित होंगी।
नए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के लिए भी प्रणाली के इस बदलाव का सीधा लाभ दिख रहा है। वे अपने कार्यकाल की शुरुआत 19 अकबर रोड के आधिकारिक आवास से करेंगे। यह बंगला पहले से ही तैयार है और सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने इसे CJI के अनुरूप सभी सुविधाओं के साथ सुसज्जित कर दिया है। सूर्यकांत के पदभार ग्रहण करने से पहले ही आवास की सुरक्षा व्यवस्था, अधिकारियों की तैनाती और अन्य जरूरी समन्वय पूरा कर लिया गया है।
यह निर्णय न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच बेहतर तालमेल का भी उदाहरण माना जा रहा है। इससे न केवल मुख्य न्यायाधीश के कार्य में सुगमता आएगी, बल्कि यह संदेश भी जाएगा कि देश की शीर्ष न्यायिक संस्था के प्रमुख को उनके महत्वपूर्ण कर्तव्यों के लिए आवश्यक सभी सुविधाएँ समय पर उपलब्ध कराई जाती हैं। यह कदम प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, समय बचाने और संवैधानिक पदों की गरिमा बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुख्य न्यायाधीश के आवास को लेकर की गई नई व्यवस्था आने वाले समय में स्थायित्व, पारदर्शिता और सहज प्रशासनिक प्रक्रिया की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित होगी।












