लोक गायिका मैथिली ठाकुर को भारतीय जनता पार्टी बीजेपी ने दरभंगा जिले की अलीनगर विधानसभा सीट से टिकट दिया है, लेकिन यह बात स्पष्ट है कि इस सीट से चुनाव जीतना आसान नहीं होगा।
मैथिली ठाकुर ने 14 अक्टूबर 2025 को बीजेपी की सदस्यता ली, और अगले ही दिन उन्हें अलीनगर से पार्टी ने उम्मीदवार बनाया। पार्टी का यह कदम युवा और लोकप्रिय चेहरे को मैदान में उतारने की रणनीति मानी जा रही है। चुनौतियाँ कम नहीं हैं। अलीनगर सीट पिछले चुनाव में वीआईपी पार्टी मुकुल सहनी नेतृत्व के कोटे में रही थी, और वहाँ बीजेपी एनडीए को मजबूत पैरवी करनी पड़ी थी। 2020 के चुनाव में मिश्रीलाल यादव ने लगभग 61,082 वोट पाकर जीत दर्ज की थी, जबकि आरजेडी के बिनोद मिश्रा को 57,981 वोट मिले थे — यानी जीत का अंतर सिर्फ लगभग 3,100 वोट का था .
अलीनगर में ब्राह्मण और यादव दोनों जातियों की मतदाता संख्या तुलनात्मक है। राजनैतिक दलों को ब्राह्मण वोट भी चाहिए, और बीजेपी इस छवि को ध्यान में रखते हुए मैथिली ठाकुर जैसे ब्राह्मण चेहरे पर भरोसा कर सकती है।
बीजेपी के स्थानीय कार्यकर्ता और सातों मंडल अध्यक्षों ने मैथिली ठाकुर को टिकट दिए जाने पर विरोध जताया है। उनका आरोप है कि संगठन को लंबे समय से काम करने वालों को नजरअंदाज किया गया है। यह आंतरिक विरोध चुनावी तालमेल को बिगाड़ सकता है।
लोकप्रियता बनाम जमीन का असर
मैथिली ठाकुर की लोकप्रियता और मंचीय छवि मजबूत है, लेकिन वह स्थानीय राजनीति, उस क्षेत्र की जमीनी समस्याओं और राजनैतिक गठजोड़ों से कितनी बेहतर जुड़ पाती हैं इस पर जनाधार निर्भर करेगा।
मैथिली ठाकुर का टिकट मिलने की खबर राजनीतिक हलकों में सुनहरे दांव की तरह है, लेकिन अलीनगर में जीत पाने के लिए उसे केवल नाम और लोकप्रियता से आगे भी बहुत काम करना होगा। संगठन को शांत करना, स्थानीय नेताओं को मनाना, जातीय समीकरणों को संतुलित करना और जनता की जमीनी जरूरतों से जुड़ना ये सब बातें निर्णायक होंगी। अगर ये सभी कारक सही दिशा में चलते हैं, तो जीत संभव है, लेकिन चुनौतियां कम नहीं हैं ।












