नई दिल्ली, 27 फरवरी पीजीडीएवी कॉलेज (सांध्य) में आयोजित सांस्कृतिक उत्सव
‘प्रवाह-2026’ राष्ट्रभावना, भारतीय संस्कृति और युवाओं की सृजनात्मक ऊर्जा का अद्भुत संगम
बनकर उभरा। कार्यक्रम ने न केवल विद्यार्थियों में देश के लिए कुछ कर गुजरने का आत्मविश्वास
जगाया, बल्कि उन्हें भारत के गौरवशाली भविष्य से जोड़ने का भी कार्य किया।
मुख्य अतिथि पद्मश्री नलिनी अस्थाना ने अपने संबोधन में कहा कि महाविद्यालय वर्षों से भारतीय
संस्कृति और सभ्यता को जीवंत बनाए रखने का सतत प्रयास कर रहा है। इस वर्ष की थीम ‘वन्दे
मातरम् : भारत का गौरव’ इस सांस्कृतिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो सशक्त और स्वाभिमानी
भारत के निर्माण की दिशा में प्रेरणा देती है।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. रवींद्र गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि ‘वन्दे मातरम्’
केवल गीत नहीं, बल्कि वह मंत्र है जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश में नवचेतना का संचार
किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को विकसित भारत के संकल्प से जोड़ना
और उनमें राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव जागृत करना है।
सांस्कृतिक समिति के संयोजक प्रो. हरीश अरोड़ा ने बताया कि वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के
उपलक्ष्य में इस बार पूरे उत्सव को इसी भावना के केंद्र में रखा गया। यह राष्ट्रगीत भारतीय ज्ञान
परंपरा, मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है, जिससे युवाओं को जोड़ना समय
की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ तनिष्का द्वारा गायत्री मंत्र के उच्चारण से हुआ, जबकि सारा ने गणेश वंदना
पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुति दी। संगीत सोसाइटी षड्ज के विद्यार्थियों ने रामचरितमानस की चौपाइयों
का सामूहिक गायन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। तुलिका के देशभक्ति गीत और
कला संघ की नेहा चौहान के कथक नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। डांस सोसाइटी तरंग की
राजस्थानी लोकनृत्य प्रस्तुति भी विशेष आकर्षण रही। मंच संचालन डॉ. प्रियंका चटर्जी ने किया और
धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मीनाक्षी यादव ने दिया।
उत्सव के अंतर्गत 28 से अधिक अंतरमहाविद्यालयीय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया,
जिनमें दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों के सैकड़ों विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपनी
प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं को ‘रंगधरा’, ‘सुर संगम’, ‘संस्कृति’, ‘विमर्श’, ‘काव्यम’,
‘चित्रांजलि’, ‘झंकार’, ‘स्वर्णचित्र’, ‘योगोत्सव’ और ‘चित्र छाया’ जैसे विशिष्ट नाम दिए गए, जो
भारतीय सांस्कृतिक चेतना को अभिव्यक्त करते हैं।
कार्यक्रम की सफलता में सांस्कृतिक समिति के प्राध्यापकों, छात्र-छात्राओं और छात्र संघ की सक्रिय
भागीदारी रही। कलांजलि समिति के अध्यक्ष जानवी राउत, उपाध्यक्ष तुषार पाण्डेय और वंशिता,
सचिव शिवानी पासवान तथा अन्य पदाधिकारियों ने आयोजन की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से
संचालित किया। छात्र संघ के सलाहकार डॉ. विपिन प्रताप सिंह सहित अनेक शिक्षकों और विद्यार्थियों
का सहयोग उल्लेखनीय रहा।
‘प्रवाह-2026’ ने भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, राष्ट्रभक्ति और युवाओं की रचनात्मक शक्ति को एक
मंच पर प्रस्तुत कर महाविद्यालय परिसर को उत्सवमय बना दिया। यह आयोजन विद्यार्थियों में
राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
र्व कॉलेज (सांध्य) में आयोजित सांस्कृतिक उत्सव
‘प्रवाह-2026’ राष्ट्रभावना, भारतीय संस्कृति और युवाओं की सृजनात्मक ऊर्जा का अद्भुत संगम
बनकर उभरा। कार्यक्रम ने न केवल विद्यार्थियों में देश के लिए कुछ कर गुजरने का आत्मविश्वास
जगाया, बल्कि उन्हें भारत के गौरवशाली भविष्य से जोड़ने का भी कार्य किया।
मुख्य अतिथि पद्मश्री नलिनी अस्थाना ने अपने संबोधन में कहा कि महाविद्यालय वर्षों से भारतीय
संस्कृति और सभ्यता को जीवंत बनाए रखने का सतत प्रयास कर रहा है। इस वर्ष की थीम ‘वन्दे
मातरम् : भारत का गौरव’ इस सांस्कृतिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो सशक्त और स्वाभिमानी
भारत के निर्माण की दिशा में प्रेरणा देती है।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. रवींद्र गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि ‘वन्दे मातरम्’
केवल गीत नहीं, बल्कि वह मंत्र है जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश में नवचेतना का संचार
किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को विकसित भारत के संकल्प से जोड़ना
और उनमें राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव जागृत करना है।
सांस्कृतिक समिति के संयोजक प्रो. हरीश अरोड़ा ने बताया कि वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के
उपलक्ष्य में इस बार पूरे उत्सव को इसी भावना के केंद्र में रखा गया। यह राष्ट्रगीत भारतीय ज्ञान
परंपरा, मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है, जिससे युवाओं को जोड़ना समय
की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ तनिष्का द्वारा गायत्री मंत्र के उच्चारण से हुआ, जबकि सारा ने गणेश वंदना
पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुति दी। संगीत सोसाइटी षड्ज के विद्यार्थियों ने रामचरितमानस की चौपाइयों
का सामूहिक गायन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। तुलिका के देशभक्ति गीत और
कला संघ की नेहा चौहान के कथक नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। डांस सोसाइटी तरंग की
राजस्थानी लोकनृत्य प्रस्तुति भी विशेष आकर्षण रही। मंच संचालन डॉ. प्रियंका चटर्जी ने किया और
धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मीनाक्षी यादव ने दिया।
उत्सव के अंतर्गत 28 से अधिक अंतरमहाविद्यालयीय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया,
जिनमें दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों के सैकड़ों विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपनी
प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं को ‘रंगधरा’, ‘सुर संगम’, ‘संस्कृति’, ‘विमर्श’, ‘काव्यम’,
‘चित्रांजलि’, ‘झंकार’, ‘स्वर्णचित्र’, ‘योगोत्सव’ और ‘चित्र छाया’ जैसे विशिष्ट नाम दिए गए, जो
भारतीय सांस्कृतिक चेतना को अभिव्यक्त करते हैं।
कार्यक्रम की सफलता में सांस्कृतिक समिति के प्राध्यापकों, छात्र-छात्राओं और छात्र संघ की सक्रिय
भागीदारी रही। कलांजलि समिति के अध्यक्ष जानवी राउत, उपाध्यक्ष तुषार पाण्डेय और वंशिता,
सचिव शिवानी पासवान तथा अन्य पदाधिकारियों ने आयोजन की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से
संचालित किया। छात्र संघ के सलाहकार डॉ. विपिन प्रताप सिंह सहित अनेक शिक्षकों और विद्यार्थियों
का सहयोग उल्लेखनीय रहा।
‘प्रवाह-2026’ ने भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, राष्ट्रभक्ति और युवाओं की रचनात्मक शक्ति को एक
मंच पर प्रस्तुत कर महाविद्यालय परिसर को उत्सवमय बना दिया। यह आयोजन विद्यार्थियों में
राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।












