भोपाल, 11 फरवरी भारतीय शास्त्रीय नृत्य के सबसे प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक 'खजुराहो
नृत्य समारोह' के 52वें संस्करण का भव्य आयोजन 20 से 26 फरवरी तक किया जा रहा है। विश्व
धरोहर स्थल खजुराहो के सुप्रसिद्ध पश्चिमी मंदिर समूह परिसर की गौरवशाली पृष्ठभूमि में आयोजित
यह समारोह इस वर्ष भी अपनी उत्कृष्ट नृत्य प्रस्तुतियों, नवाचारों और नवीन आयामों के साथ कला
प्रेमियों को मंत्रमुग्ध करेगा।
यह जानकारी मंगलवार को संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला ने
भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश की पावन धरा कला और
संस्कृति की सुगंध एक बार फिर विश्व पटल पर बिखरने को तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के
मार्गदर्शन में संस्कृति विभाग द्वारा समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक-परंपराओं और शास्त्रीय कलाओं के
संरक्षण और प्रसार के लिए निरंतर सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग का लक्ष्य इस जीवंत परंपरा को
जन-जन तक पहुँचाकर मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊचाइयां प्रदान करना है।
अपर मुख्य सचिव शुक्ला ने बताया कि खजुराहो नृत्य समारोह वास्तव में भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा
की वह जीवंत साधना है, जहां इतिहास, अध्यात्म और सौंदर्य के अद्भुत संगम का शाहकार होता है।
भव्य मंदिरों के प्रांगण में आयोजित यह समारोह नृत्य को केवल एक मंचीय प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक
पवित्र सांस्कृतिक अनुष्ठान के रूप में प्रतिष्ठित करता है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष समारोह की केंद्रीय थीम ‘नटराज’ रखी गई है, जो भारतीय नृत्य की
आध्यात्मिक चेतना, लयबद्धता और सृजनात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। मंच पर भरतनाट्यम,
कथक, ओडिसी, कुचिपुड़ी और मोहिनीअट्टम जैसे शास्त्रीय नृत्य रूप अपनी परंपरागत गरिमा और
शास्त्रबद्धता के साथ प्रस्तुत होंगे। समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि
इस वर्ष देश के 7 पद्मश्री और 6 संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त दिग्गज कलाकारों के साथ
उभरते हुए युवा कलाकार भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। विभाग का यह विशेष प्रयास है कि नई
पीढ़ी के कलाकारों को अधिक अवसर प्रदान किए जाएं।
अपर मुख्य सचिव शुक्ला ने बताया कि इस वर्ष समारोह में कई नवाचार देखने को मिलेंगे। पहली बार
खजुराहो की सड़कों पर एक 'सांस्कृतिक रैली' का आयोजन किया जाएगा, जो 20 फरवरी को समारोह के
शुभारंभ के साथ निकलेगी। इस रैली में विभिन्न विधाओं के कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में नगर भ्रमण
करते हुए मुख्य कार्यक्रम स्थल तक पहुंचेंगे। 'राष्ट्रीय खजुराहो बाल नृत्य महोत्सव' को भी अब राष्ट्रीय
स्वरूप प्रदान किया गया है। 10 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बाल कलाकारों को मंच प्रदान करने के उद्देश्य
से आयोजित इस महोत्सव हेतु देश के 23 राज्यों से 310 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें कथक के 136
और भरतनाट्यम के 106 आवेदन शामिल हैं। इन नन्हें कलाकारों का चयन वरिष्ठ कला गुरुओं द्वारा
किया जाएगा और उनका प्रदर्शन मेला परिसर के विशेष मंच पर होगा।
उन्होंने बताया कि समारोह को और अधिक समावेशी बनाने के लिए इस वर्ष 'खजुराहो कार्निवाल' का
पहली बार शुभारंभ किया जा रहा है। शिल्प ग्राम में आयोजित होने वाले इस कार्निवाल में 10 राज्यों के
कलाकार अपनी लोक कलाओं, लोक नृत्यों और पारंपरिक शिल्पों का प्रदर्शन करेंगे। साथ ही, कार्निवाल के
दौरान शास्त्रीय एवं उप-शास्त्रीय नृत्यों की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। बौद्धिक संवाद के
लिए 'कलावार्ता' का आयोजन होगा, जहाँ कलाविद् खजुराहो के मंदिर स्थापत्य और कला परंपराओं पर
चर्चा करेंगे। 'लयशाला' के माध्यम से विद्यार्थी प्रतिष्ठित गुरुओं से नृत्य के तकनीकी पक्षों की बारीकियां
सीखेंगे। वहीं, 'आर्ट-मार्ट' में समकालीन भारतीय चित्रकला और 'सृजन एवं हुनर' में पारंपरिक शिल्प
तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन और विक्रय किया जाएगा। भोजन के शौकीनों के लिए 'स्वाद' प्रदर्शनी में
मध्यप्रदेश के जनजातीय और क्षेत्रीय व्यंजनों का आनंद उपलब्ध होगा।
उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग ने इस बार पर्यटकों के रोमांच को दोगुना करने के लिए विशेष इंतजाम
किए हैं। ई-बाइक टूर, सेगवे टूर और विलेज टूर जैसी गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण संस्कृति को
करीब से जानने का अवसर मिलेगा। साहसिक पर्यटन के शौकीन पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के पास झिन्ना
एवं मड़ला में कैंपिंग कर सकते हैं और 'वॉक विद पारधी' के तहत प्रकृति भ्रमण का आनंद ले सकते हैं।
कुटनी आईलैंड में वॉटर स्पोर्ट्स जैसे स्पीड बोट और शिकारा नाव की सवारी का भी प्रबंध किया गया है।
स्थानीय कला को प्रोत्साहन देने के लिए टेराकोटा, बुंदेली पेंटिंग और बीड ज्वेलरी के प्रत्यक्ष प्रदर्शन
स्टॉल लगाए जाएंगे। कुल मिलाकर, यह समारोह नृत्य, शिल्प, संवाद और पर्यटन का एक ऐसा अनूठा
मंच बनेगा जो मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त करेगा।
खजुराहो महोत्सव संस्कृति विभाग द्वारा उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी, भारतीय
पुरातत्व सर्वेक्षण, मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन छतरपुर के साझा सहयोग से आयोजित
किया जा रहा हैं।












