बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद देशभर में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर राजधानी ढाका समेत कई जिलों में व्यापक विरोध प्रदर्शन भड़क उठे। भीड़ ने जगह-जगह वाहनों को आग के हवाले कर दिया, जिसके चलते सड़कें धुएँ और अफरा-तफरी से भर गईं। शुक्रवार रात से शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुका है, जिसमें राजधानी ढाका सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, ढाका में हुई हिंसक झड़पों में अब तक 50 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। इनमें आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षाबलों के जवान भी शामिल हैं, जिन्हें उपद्रवियों द्वारा पत्थरबाजी और पेट्रोल बम से निशाना बनाया गया। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस ने कई इलाकों में आँसू गैस के गोले दागे और रबर की गोलियाँ चलाईं। इसके बावजूद भीड़ को तितर-बितर करने में सुरक्षा बलों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
पिछले एक हफ्ते में देशभर में 50 से अधिक आगजनी की घटनाएँ और हमले दर्ज किए जा चुके हैं। कई जिलों में सरकारी भवनों, बसों और दुकानों को निशाना बनाया गया, जिससे करोड़ों टका की संपत्ति का नुकसान हुआ है। लगातार बढ़ रही हिंसा के बीच प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में धारा 144 लागू कर दी है और अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है। राजधानी के कई हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएँ भी अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं, ताकि अफवाहों और उकसाने वाली पोस्ट्स पर रोक लगाई जा सके।
विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने फैसले को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी भी प्रकार की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि उपद्रवियों से सख्ती से निपटा जाए और शांति व्यवस्था हर हाल में बहाल की जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि शेख हसीना को मिली सजा बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है। उनके समर्थक फैसले को उनके खिलाफ साजिश करार दे रहे हैं, जबकि उनके विरोधी इसे न्याय की जीत बता रहे हैं। राजनीतिक ध्रुवीकरण के बढ़ते माहौल में देश की आंतरिक शांति और आर्थिक गतिविधियों पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन हालात को काबू में करने के लिए लगातार प्रयासरत है। लेकिन यह साफ है कि आने वाले दिनों में बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल और गहरा सकती है।












