भारत में जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 60बे सत्र में मानवाधिकारों के मुद्दे पर पाकिस्तान के चरित्र को उजागर किया है , भारत ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न को उजागर करते हुए इसकी तीखी आलोचना की है , भारत का प्रतिनिधित्व इस समय राजनाइक मोहम्मद हुसैन कर रहे हैं उन्होंने कहा यह विडंबना ही है कि मानवाधिकारों के मामले में सबसे खराब रिकॉर्ड वाला देश दूसरे देशों को उपदेश देने का प्रयत्न कर रहा है ।
उन्होंने बैठक को संबोधित करते हुए कहा पाकिस्तान भारत के विरुद्ध मनगढ़ंत आरोप लगाकर इस मंच का दुरुपयोग करते हैं जो उनके चरित्र को उजागर करता है दुष्प्रचार का सहारा लेने की बजाय पाकिस्तान को अपनी ही देश में हो रहे धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों के विरुद्ध राज्य प्रायोजित उत्पीड़न और व्यवस्थित भेदभाव की ओर देखना चाहिए ।
मानवाधिकार परिषद का यह सत्र ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में असंतोष के हालात हैं और पिछले कई दिनों से वहां निरंतर विरोध प्रदर्शन और हिंसाएं हो रही है , जिसमें कई लोगों की हत्या भी की गई है यूनाइटेड कश्मीर के प्रवक्ता नासिर अजीज खान ने कहा , पाकिस्तान के बढ़ते दमन के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की, उन्होंने पीओके में हालिया विरोध प्रदर्शन पर बात की जिसमें 29 सितंबर को संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में पूर्ण बंद और चक्का जाम हड़ताल की गई ।
उन्होंने इस्लामाबाद पर असहमति को दबाने के लिए सेना तैनात करने इंटरनेट सेवाएं बंद करने और संचार व्यवस्था ठप करने का आरोप लगाया उन्होंने कहा पी ओ j के में 30 लाख से ज्यादा कश्मीरी घेरे में है जबकि विदेशों में 20 लाख लोग अपने परिवार से कटे हुए ।
पीओके में कई दिनों से हिंसक विरोध और प्रदर्शन हो रहा है जिसमें हाल के दिनों में हुए प्रदर्शन में पीओके में बिजली की दरों में कमी सब्सिडी वाले गेहूं के आटे और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं जैसी मांगों को लेकर कहीं दिनों से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं ।
शांतिपूर्ण हड़ताल से शुरू हुआ यह प्रदर्शन हिंसक हो गया है इसमें कम से कम तीन लोग मारे गए हैं और 22 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं प्रदर्शनकारी पाकिस्तान में बसे शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को भी हटाने की मांग कर रहे हैं,
इसमें पहले जिनेवा में चल रहे सत्र के दौरान आयोजित एक सेमिनार में भी पाकिस्तान और बांग्लादेश में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति पर प्रकाश डाला गया था ।










