कोल्ड्रिफ सिरप से हुई बच्चों की मौत के मामले की जांच नहीं करेगी CBI, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की खारिज
कोल्ड्रिफ खांसी सिरप (Coldrif Cough Syrup) से बच्चों की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की जांच पहले से ही संबंधित राज्य एजेंसियों द्वारा की जा रही है और इसमें किसी भी केंद्रीय एजेंसी के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।
मामला हरियाणा की एक दवा कंपनी द्वारा बनाए गए कोल्ड्रिफ सिरप से जुड़ा है, जिसके सेवन के बाद कई देशों में दर्जनों बच्चों की मौत हो गई थी। विशेष रूप से गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में इन सिरपों के सेवन से बच्चों की जान जाने के बाद भारत सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गंभीर चिंता जताई थी।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि दवा निर्माण और निर्यात प्रक्रिया में लापरवाही को लेकर सीबीआई जांच कराई जाए, ताकि जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो सके। हालांकि, अदालत ने यह कहते हुए याचिका खारिज की कि सरकार ने पहले ही इस मामले में पर्याप्त कदम उठाए हैं और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जा चुकी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि “हर मामले में सीबीआई जांच की मांग न्यायिक प्रक्रिया का समाधान नहीं हो सकती।”
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दवा नियामक एजेंसियों को निर्देश दिया कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों, इसके लिए दवाओं की क्वालिटी कंट्रोल व्यवस्था को और सख्त किया जाए। कोर्ट ने कहा कि देश की दवा उद्योग की साख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित हुई है, इसलिए निगरानी प्रणाली को और पारदर्शी और जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए।
केंद्र सरकार ने भी अदालत में दलील दी थी कि स्वास्थ्य मंत्रालय और ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) इस मामले की गहराई से जांच कर चुके हैं, और जिन दवा बैचों में खराबी पाई गई थी, उन्हें बाजार से वापस ले लिया गया है।
इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि कोल्ड्रिफ सिरप से हुई मौतों की जांच राज्य स्तरीय एजेंसियों और दवा नियामक तंत्र के दायरे में ही जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय भारत के फार्मास्यूटिकल सेक्टर में जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।












