हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ स्थित उनके आवास पर कथित आत्महत्या के मामले में तूल पकड़ता जा रहा है। उनके द्वारा छोड़ी गई आठ पृष्ठों की फाइनल नोट में हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर और आठ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर जातिवाद, मानसिक उत्पीड़न और सार्वजनिक अपमान का आरोप लगाया गया है। इससे राज्य सरकार पर दबाव बढ़ गया है, जिसके परिणामस्वरूप डीजीपी कपूर को सोमवार रात अवकाश पर भेज दिया गया। उनकी जगह ओम प्रकाश सिंह को अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
पूरन कुमार की पत्नी, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार ने आरोप लगाया कि एफआईआर में एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं कमजोर थीं। उनकी मांग पर पुलिस ने धारा जोड़ी है, जो जातिगत उत्पीड़न के मामलों में कठोर सजा का प्रावधान करती है। हालांकि, परिवार ने पोस्टमॉर्टम की अनुमति नहीं दी है, जब तक आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती।
इस मामले में विपक्षी दलों ने भी सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पूरन कुमार के परिवार से मुलाकात की योजना बनाई है, जबकि तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टि विक्रमारका और मुख्यमंत्री ए. रेवंथ रेड्डी ने भी परिवार से मुलाकात की और आरोपों की जांच की मांग की। भट्टि ने आरोप लगाया कि डीजीपी कपूर का रवैया दलित विरोधी था। पूर्व सांसद और पूर्व आईएएस अधिकारी ब्रिजेंद्र सिंह ने भी जातिवाद के खिलाफ चेतावनी दी और इसे गांधी की हत्या जैसे गंभीर परिणामों से जोड़ा।
इस बीच, हरियाणा सरकार ने राज्यव्यापी अलर्ट जारी किया है और चंडीगढ़ में पूरन कुमार के घर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी आज परिवार से मिलने के लिए चंडीगढ़ पहुंचने वाले हैं। इस मामले में विशेष जांच दल गठित किया गया है, जो आरोपों की निष्पक्ष जांच करेगा।
पूरन कुमार की आत्महत्या ने प्रशासनिक तंत्र में जातिवाद और मानसिक उत्पीड़न के मुद्दों को उजागर किया है, जिससे राज्य सरकार और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।












