बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जब 243 सीटों पर चल रही हार-जीत की गिनती शुरू हुई, तब हर निगाह उस पर थी जिसने अकेले 200 से अधिक सीटों पर मैदान में उतरे थे , जन सुराज पार्टी । इस दल का नेतृत्व कर रहे हैं प्रशांत किशोर जिन्होंने राजनीतिक रणनीति के क्षेत्र में छाप छोड़ी थी और अब खुद राजनीति में उतर आए थे। लेकिन गिनती के लगभग साढ़े तीन-घंटे बाद तक इस नए दल का वोट-ब्योरा सार्वजनिक नहीं हुआ और यह स्थिति राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गई।
गिनती की प्रक्रिया के आरम्भ में ही प्रवृत्तियों से संकेत मिल रहे थे कि नतीजे उनसे विचलित होंगे , जहाँ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक दल (एनडीए) को बड़ी बढ़त मिल रही थी, वहीं JSP का नाम आंकड़ों में कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स में स्पष्ट था: “JSP कहीं नहीं दिख रही है और डेटा अभी तक नहीं आया जैसी पंक्तियाँ छपी थीं।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि JSP ने अकेले 200 + से अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे जो कि आदर्श-परिस्थिति में एक बड़ी ताकत का परिचायक होना चाहिए था। फिर भी, मतगणना शुरू होने के लगभग साढ़े तीन घंटे के बाद भी उनकी कोई निश्चित वोट-शेयर सार्वजनिक नहीं हुआ। इससे राजनीतिक विश्लेषक और मतदाता दोनों में हैरानी पनपी , क्या वास्तविक वोट बहुत कम थे, या प्रदर्शन इतना कमजोर था कि उन्हें प्राथमिक आंकड़ों में स्थान नहीं मिला?
वास्तव में, प्रारंभिक रुझानों में JSP ने हाथ झटक दिया था। कुछ सीटों पर उनका हल्की बढ़त भी दिखी थी, लेकिन जल्दी ही वो सब खत्म हो गया। उदाहरण के लिए, एक रिपोर्ट के अनुसार तीन से चार सीटों पर शुरुआत में बढ़त थी, फिर 0 सीटों पर आ गया। दूसरी ओर, JSP के नेतृत्व ने इस प्रदर्शन को स्वीकार करते हुए कहा है कि जनता ने उनके विजन को पर्याप्त समझा नहीं।
अब सवाल यह है: JSP को कितने वोट मिले? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सार्वजनिक आंकड़ों में अभी तक उनका कुल वोट-शेयर या मतों की संख्या स्पष्ट नहीं दी गयी है। उदाहरण के लिए उन्हें पर्याप्त वोट नहीं मिले की बात तो कही जा रही है, लेकिन अब तक कोई भरोसेमंद शुद्ध आंकड़ा सामने नहीं आया है।
इसका मतलब यह है कि, राजनीतिक संवाद में इस प्रकार जाना जा रहा है कि JSP का प्रदर्शन बेहद सीमित रहा। वे बड़े दावों के साथ 200+ सीटों पर उतरे थे, लेकिन जैसे-जैसे गिनती आगे बढ़ी, उनकी नाममात्र की उपस्थिति ही सामने आई। इस तरह से, 2025 के बिहार चुनाव में उनकी वास्तविक वोट-मंजूरी और असर अभी-भी अस्पष्ट है।
भविष्य के लिए यह बात दिलचस्प है कि क्या JSP इस प्रदर्शन के बाद अपने स्त्रोत को पुनर्गठित करेगी या अपने मॉडल में बदलाव लायेगी। PK ने पहले ही यह कह दिया था कि यह या तो , अर्श पर होगा या फर्श पर यानी इस तरह का पदार्पण या तो दमदार होगा या पूरी तरह विफल। वर्तमान स्तर पर यह लग रहा है कि फर्श की ओर हैं।
इसलिए, यह निष्कर्ष निकलता है कि जनसुराज पार्टी को अभी तक स्पष्ट वोट-संख्या नहीं मिली है और उनकी अपेक्षा से बहुत पीछे रही है। जैसे-जैसे पूरी गिनती और संपूर्ण विवरण सामने आएँगे, घटना-व्याख्याकारों के लिए यह शोध का विषय बनेगा कि इस नई राजनीतिक ताकत को क्यों अपना आधार नहीं मिल सका।












