देश के सबसे आधुनिक और महत्वाकांक्षी हवाई अड्डों में शुमार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर एयरपोर्ट ने गुरुवार को एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। यहां पहली टेस्ट फ्लाइट सफलतापूर्वक लैंड हो गई, जिससे हवाई अड्डे के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम पूरा हो गया।
इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए बड़ी संख्या में हवाई अड्डा प्राधिकरण, डीजीसीए (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) के अधिकारी और निर्माण से जुड़े विशेषज्ञ मौजूद रहे। जानकारी के अनुसार, डीजीसीए ने मौसम अनुकूल होने पर उड़ान की अनुमति दी थी। इससे पहले 30 अक्टूबर को खराब मौसम और दृश्यता कम होने के कारण टेस्ट फ्लाइट की लैंडिंग को स्थगित कर दिया गया था।
अधिकारियों के मुताबिक, इस सफल लैंडिंग के साथ ही कैलिब्रेशन प्रक्रिया भी पूरी हो जाएगी, जो हवाई अड्डे की तकनीकी और नेविगेशनल सिस्टम की सटीकता जांचने का अंतिम चरण होता है। इसमें रनवे, इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम , लाइटिंग और कम्युनिकेशन उपकरणों का मूल्यांकन किया जाता है, ताकि वाणिज्यिक उड़ानें शुरू होने से पहले सभी मानकों की पुष्टि हो सके।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के सीईओ के अनुसार, यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि परियोजना अपने तय समय के भीतर पूरी होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि अब एयरपोर्ट के शेष इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य और परीक्षण तेजी से पूरे किए जा रहे हैं, ताकि आगामी महीनों में यहां से वाणिज्यिक उड़ानें शुरू की जा सकें।
बताया जा रहा है कि एयरपोर्ट का पहला चरण दिसंबर 2025 तक पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। इस चरण में एक रनवे और एक टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण किया गया है, जिसकी सालाना क्षमता लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की होगी।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जो कि Dehli NCR का दूसरा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनने जा रहा है, उत्तर भारत के विमानन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखता है। यह एयरपोर्ट न केवल दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के यात्रियों को राहत देगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के यात्रियों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
सफल टेस्ट फ्लाइट के साथ अब उम्मीद है कि आने वाले महीनों में यह एयरपोर्ट भारत की उड्डयन सेवाओं के नए युग की शुरुआत करेगा।












