प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पटना साहिब स्थित ऐतिहासिक तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब गुरुद्वारे में मत्था टेका और आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर उन्होंने सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज और माता साहिब कौर जी के पवित्र जोरे साहिब के दर्शन किए। प्रधानमंत्री ने इसे अपने जीवन का एक “दिव्य और प्रेरणादायक अनुभव” बताया।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने गुरुद्वारे में मत्था टेकने के बाद वहां की मर्यादा के अनुसार सेवा की और सिख परंपराओं के बारे में जानकारी ली। पीएम ने श्रद्धालुओं के साथ संवाद किया और गुरु गोबिंद सिंह जी के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने न केवल सिख धर्म को मजबूती दी बल्कि पूरी मानवता के लिए त्याग, साहस और सेवा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
प्रधानमंत्री ने दिव्य गुरु चरण यात्रा में भाग लेने वाले सभी श्रद्धालुओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह यात्रा भक्ति, एकता और मानवता का प्रतीक है। मोदी ने देशभर के लोगों से पटना साहिब आकर गुरु के आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पटना की यह पवित्र भूमि केवल बिहार की नहीं, बल्कि पूरे भारत की आत्मा से जुड़ी हुई है। यहां आकर जो शांति और ऊर्जा मिलती है, वह शब्दों में बयान नहीं की जा सकती।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री को गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने सम्मानित भी किया। उन्होंने गुरुद्वारे की सुंदरता, अनुशासन और सेवाभाव की सराहना की। मोदी ने कहा कि सिख समुदाय ने हमेशा देश की रक्षा, समाजसेवा और मानवता की सेवा में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोबिंद सिंह जी तक सभी गुरुओं के उपदेशों को भारत की सांस्कृतिक धरोहर बताया।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और सिख परंपराएं इस एकता की जीवंत मिसाल हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे गुरु गोबिंद सिंह जी के आदर्शों , त्याग, साहस, सेवा और सत्य को अपने जीवन में अपनाएं।
कार्यक्रम के दौरान पटना साहिब गुरुद्वारे में भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। वातावरण ‘जो बोले सो निहाल’ के जयघोष से गूंज उठा। प्रधानमंत्री ने अंत में गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष नतमस्तक होकर देशवासियों की शांति, समृद्धि और एकता की कामना की।
यह दौरा प्रधानमंत्री मोदी के धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को एक बार फिर दर्शाता है, जिसमें उन्होंने आध्यात्मिकता के साथ भारतीय परंपराओं के सम्मान का संदेश दिया।












