आज पूरे देश में आस्था, श्रद्धा और उत्साह के साथ कार्तिक पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। इसे देव दीपावली, त्रिपुरारी पूर्णिमा और गंगा स्नान पर्व के रूप में भी जाना जाता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु, भगवान शिव और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इस वर्ष की कार्तिक पूर्णिमा खगोलीय दृष्टि से बेहद खास मानी जा रही है। इस बार पूर्णिमा तिथि पर गुरु, चंद्रमा और बृहस्पति के विशेष संयोग बन रहे हैं, जिससे यह दिन और भी शुभ हो गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा बुधवार के दिन पड़ी है और इस दिन मृगशिरा नक्षत्र तथा वृषभ राशि में चंद्रमा का संचार हो रहा है। यह संयोग लगभग दो दशक बाद बना है, जिसके कारण इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और बढ़ गया है।
सुबह से ही देशभर के तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। वाराणसी, प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक, उज्जैन और गया जैसे पवित्र स्थलों पर लाखों भक्तों ने गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान कर पुण्य अर्जित किया। वाराणसी में गंगा घाटों पर दीपों की जगमगाहट ने अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया, जिसे देखने देश-विदेश से आए पर्यटक मंत्रमुग्ध हो गए। इसे देव दीपावली के रूप में भी मनाया जाता है, जब गंगा तट पर हजारों दीये जलाकर देवताओं का स्वागत किया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान, दान और दीपदान का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि इस दिन किया गया एक दीपदान हजारों दीपों के बराबर फल देता है। इसके अलावा, इस दिन श्रीहरि विष्णु और भगवान शिव की आराधना करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कई स्थानों पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। राजस्थान के पुष्कर में प्रसिद्ध पुष्कर मेला अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है, जहां श्रद्धालु पवित्र सरोवर में स्नान कर भगवान ब्रह्मा के दर्शन कर रहे हैं।
समग्र रूप से देखा जाए तो इस वर्ष की कार्तिक पूर्णिमा न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि खगोलीय दृष्टि से भी अत्यंत शुभ है। श्रद्धालुओं के लिए यह दिन ईश्वर भक्ति, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक बन गया है। पूरे देश में आज का दिन आस्था, प्रकाश और पवित्रता का उत्सव बन चुका है।












